पानी के लिए तरसते यहाँ के एक गाँव में दो बहनों ने कुआँ खोदकर पुरुष प्रधान समाज और प्रशासन को ठेंगा दिखा दिया है।
मामला यहाँ से 230 किमी दूर पेसागढ़ गाँव का है। यहाँ की रहने वाली हाजरा बानू और राबिया ने कुआँ खोदकर गाँव वालों की प्यास बुझाई।
यह कदम उन्होंने तब उठाया जब गिरीडीह प्रशासन उनके आग्रह पर कोई ध्यान नहीं दे रहा था। दरअसल इस गाँव की समस्या है कि यहाँ पानी नहीं है। पेसागढ़ में हैंडपंप बहुत कम है और इस वजह से ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
इन दो बहनों ने तय किया कि वे गाँव में पीने के पानी के संकट से निजात पाने के लिए कुआँ खोदेंगी, परंतु गाँव का कोई भी आदमी उनका साथ देने के लिए आगे नहीं बढ़ा।
हाजरा बानू ने बताया कि जब स्थानीय प्रशासन और नेताओं से संपर्क किया और जब लगने लगा कि हमारी माँग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है तो हमने तय किया कि हम ही खोद लेंगे कुआँ। हमने करीब 15 फुट तक कुआँ खोद लिया है और अगले सप्ताह में इसे पूरा कर लेंगे।
दोनों नवंबर माह से इसमें लगी हुई हैं और कोई भी मदद के लिए नहीं आया। अब चूँकि काम पूरा होने आ गया है तो गाँव वाले और नेता प्रशंसा कर रहे हैं और दुआ दे रहे हैं।
भाजपा के नेता चंद्रमोहन प्रसाद पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री भी रहे हैं, ने भी जब दोनों बहनों का श्रम देखा तो उन्होंने आश्वस्त किया कि वे जिला प्रशासन से सारी मदद करने को कहेंगे।
रबिया कहती हैं कि इससे फर्क नहीं पड़ता है कि हमें सहायता मिलती है या नहीं, हम काम पूर्ण करके गाँव वालों को पानी देंगे। गाँव के मोहम्मद समीम कहते हैं कि दोनों बहनों का काम युवाओं के लिए प्रेरणा है। (नईदुनिया)
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