पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में यौनकर्मियों द्वारा स्थापित और संचालित बैंक उषा बहुद्देश्यीय सहकारिता सोसायटी का कुल कारोबार नौ करोड़ रुपए पहुँच गया है। बैंक का कारोबार राज्य के पाँच जिलों तक फैला है और उसके ग्राहकों की संख्या साढ़े आठ हजार तक पहुँच चुकी है।
स्वयंसेवी संगठन दरबार महिला सम्मान समिति ने कोलकाता की सबसे बड़ी बदनाम बस्ती सोनागाछी इलाके में 1995 में इस बैंक की स्थापना की थी। शुरुआत में मुट्ठीभर यौनकर्मी इसके ग्राहक बने लेकिन आज बैंक की सात शाखाएँ हैं जिनमें से दो कोलकाता में हैं। इसके अलावा दक्षिण और उत्तर 24 परगना, नादिया और मुर्शिदाबाद में एक-एक शाखा है। बैंक अब तक कुल 15 लाख रुपए के कर्ज दे चुका है।
बैंक के एक अधिकारी शांतनु चटर्जी ने बताया कि यौनकर्मियों के बीच काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों का मानना है कि यौनकर्मियों में पैसा बचाने की आदत नहीं होती है लेकिन अब बैंक में रोजाना 50 हजार रुपए जमा कराए जा रहे हैं।
बऊ बाजार में सक्रिय यौनकर्मी और बैंक की अध्यक्ष अनीता दास का कहना है कि उनकी अन्य बदनाम बस्तियों में शाखाएँ खोलने की योजना है।
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