विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर ने भारत द्वारा चीन या उसके विकास को एक खतरे के रूप में नहीं देखने की बात का उल्लेख करते हुए रविवार को कहा कि दोनों देश प्रतिद्वंद्विता पर आधारित रिश्ता रखने में सक्षम नहीं होंगे और इन्हें समृद्धि एवं साझा भलाई के लिए हाथ मिलाना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच की सीमाएँ बहुत अधिक शांतिपूर्ण है और सीमा समस्याओं को ‘वार्ता और कूटनीति’ के जरिये समाधान करना चाहिए।
उन्होंने यहाँ ‘उभरता चीन : एशिया में साझेदारी के परिदृश्य’ विषय पर एक सम्मेलन में कहा कि भारत सरकार चीन या चीनी विकास को किसी तरह के खतरे के रूप में नहीं देखता है। हम चीन के साथ एक दोस्ताना और सहयोगी रिश्ते तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं, जो हमारा सबसे बड़ा पड़ोसी देश है और जिसके साथ हम प्रतिरोध का रिश्ता नहीं रख सकते।
थरूर ने कहा कि भारत और चीन को आर्थिक मंदी से बाहर निकालने में विश्व अर्थव्यवस्था की मदद कर नई वैश्विक चुनौतियों का एक साथ हल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों में सीमा को लेकर कुछ मतभेद हैं और हमारा मानना है कि वार्ता और कूटनीति इन मतभेदों को हल करने की कुंजी है। विदेश राज्यमंत्री ने कहा कि दोनों देशों ने इस तरह के मुद्दे को क्रियात्मक क्षेत्रों की राह में नहीं आने देने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि यदि चीनी उद्घोषक भारत के प्रति अपनी समझ को गहरा करते हैं तो यह मदद करेगा। हमें चीन को और अधिक समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि मीडिया एक जिम्मेदार भूमिका अवश्य निभाएगी, जो इस मुद्दे पर हमेशा रचनात्मक नहीं रहती है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वे मतभेदों का समाधान ढूँढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। (भाषा)