हुर्रियत के नरमपंथी धड़े के नेता मीरवाइज उमर फारुक की चीन जाने की योजना पर सरकार ने कहा कि इस पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन उनका वीजा पासपोर्ट के बजाय स्टेपल किए गए कागज में होने पर उन्हें रोक दिया जाएगा।
हालाँकि उधर श्रीनगर में मीरवाइज ने इस पर आपत्ति जताई है और अपने इस बयान से विवाद पैदा कर दिया कि बीजिंग की क्षेत्रीय शांति में ‘हिस्सेदारी’ है क्योंकि कश्मीर के कुछ हिस्से उसके कब्जे में हैं।
विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने हुर्रियत नेता को एक एनजीओ के सेमिनार में चीन जाने की इजाजत संबंधी प्रश्न पर कहा कि वह जहाँ चाहें जाने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय इस तरह की यात्राओं को बढ़ावा देता है, चाहे वे ‘पाकिस्तान या चीन की ही क्यों न हों।
बाद में इसी तरह के एक सवाल पर विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा कि हमने पहले कई मौकों पर कहा है कि हमने कश्मीरी नेताओं को विदेश यात्रा से नहीं रोका है। हालाँकि उन्होंने कहा कि यदि सवाल चीन सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर के भारतीय नागरिकों को वीजा जारी (पासपोर्ट के बजाय अलग कागज पर) करने के संदर्भ में है तो भारत सरकार इस तरह की पहल को मंजूर नहीं करेगी।
चीन ने स्टेपल किए गए कागज पर वीजा देना शुरू करके एक तरह से यह संकेत दिया है कि वह जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं मानता।
उधर मीरवाइज ने श्रीनगर में कहा कि कश्मीरियों को स्टेपल किए गए वीजा पर चीन जाने की इजाजत दी जाए जो चीन उन्हें दे रहा है।
मीरवाइज ने यह भी कहा कि चीन एक वैश्विक शक्ति है और क्षेत्र में उसका बड़ा प्रभाव है और इस तरह चीन का कश्मीर से सीधा नाता है क्योंकि कश्मीर के कुछ हिस्से चीन के नियंत्रण में हैं, जो पाकिस्तान ने उसे दिए हैं..इनमें अकसाई चीन आदि इलाके शामिल है। (भाषा)