गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने बुधवार को कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून लागू करने के लिए देश में दस लाख अतिरिक्त शिक्षकों की जरूरत होगी। इसके लिए शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों की वृद्धि और व्यापक शिक्षा के लिए आईसीटी के इस्तेमाल के अलावा शिक्षण के पेशे की गरिमा और मान सम्मान को बहाल करने की आवश्यकता है ।
प्रधानमंत्री ने देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के मौके पर आयोजित ‘राष्ट्रीय शिक्षा दिवस’ समारोह में कहा कि शिक्षा के अधिकार को हासिल करना महज शैक्षणिक ढाँचे के विस्तार पर निर्भर नहीं करता बल्कि इसके लिए अपने पेशे के प्रति प्रतिबद्ध प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
सिंह ने कहा कि यूनेस्को ने दुनिया भर में सार्वभौम प्राथमिक शिक्षा के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अगले सात वर्षों में एक करोड़ 80 लाख प्राथमिक शिक्षकों की आवश्यकता का अनुमान लगाया है। भारत में भी हमें शिक्षा के अधिकार कानून को लागू करने के लिए दस लाख अतिरिक्त शिक्षकों की जरूरत होगी।
उन्होंने कहा कि इस कार्य के लिए शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों की वृद्धि और व्यापक शिक्षा के लिए सूचना संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के इस्तेमाल के अलावा शिक्षण के पेशे की गरिमा और मान-सम्मान को बहाल करने की आवश्यकता है। (भाषा)