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मुख पृष्ठ » खबर-संसार » समाचार » राष्ट्रीय » नम आँखों से प्रभाषजी को अंतिम विदाई (Prbhash Joshi Passed away)
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अंत्येष्टि स्थल पर मूर्धन्य पत्रकार प्रभाष जोशी को श्रद्धांजलि देते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत ने कहा कि प्रभाष के जाने से एक सच्चा मित्र चला गया। उनके जीवन मूल्य हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे। उन्होंने हिन्दी पत्रकारिता को जो दिशा दी है उम्मीद है कि आज की पीढ़ी उसका आगे निर्वाह करेगी।

पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजयसिंह ने कहा कि जोशी की कमी भरना मुश्किल है। वे पत्रकार के साथ चिंतक थे। उनका जीवन अद्वितीय था। वे मेरे मित्र व अभिभावक के रूप में रहे हैं। वो मेरी मर्जी के खिलाफ भी मुझे सलाह देने से चूकते नहीं थे। मुझे निजी तौर पर गहरा आघात लगा है।

मालवा के गौरव : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने कहा कि प्रभाषजी के जाने से हिन्दी पत्रकारिता का बड़ा स्थान खाली हो गया है। इसकी पूर्ति करना बहुत कठिन है। उन्होंने मालवा का नाम देश में कोने-कोने तक पहुँचाया। उनका प्रेम व मार्गदर्शन मुझे सदैव मिलता रहा। मेरी व्यक्तिगत क्षति हुई है।

राष्ट्रहित में लेखनी : स्वामी अग्निवेश ने कहा कि प्रभाष जोशी की लेखनी राष्ट्रहित में तीखी टिप्पणियों से भरी होती थी। वे एक ऐसा व्यक्तित्व थे जो सबके लिए पत्रकारिता के साथ-साथ एक मित्रता का भाव लिए रहता थे। मैं आज बेहद गमगीन हूँ।

प्रभाष परंपरा कायम रहे : पत्रकार राहुल देव ने कहा कि कल से पत्रकारिता की एक प्रभाष परंपरा प्रारंभ होगी। हम सबकी उनके जाने के बाद यह जिम्मेदारी है कि पत्रकारिता में उन्होंने जो शैली निर्मित की है, उस परंपरा को हम आगे बढ़ाएँ। खरी, सच्ची एवं निर्भीक पत्रकारिता उनकी शैली का हिस्सा था। प्रभाषजी को सबसे प्यार मिला। वे सिर्फ पत्रकार नहीं रहे पत्रकारिता के बाहर जाकर भी उन्होंने स्थान बनाया। मैं उस प्रभाष परंपरा को प्रणाम करता हूँ।

योद्घा पत्रकार : माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि वे अचानक और अकेले चले गए। उनकी तरह का योद्घा पत्रकार अब न जाने कब आएगा। उनके अवसान से न केवल हिन्दी बल्कि समूचे भारतीय पत्रकारिता की क्षति हुई है। उनकी स्मृति को मेरा हार्दिक प्रणाम।

हिन्दी पत्रकारिता को नया आयाम दिया : राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के प्रमुख कैलाश पंथ ने कहा कि प्रभाषजी ने हिन्दी पत्रकारिता को अंग्रेजी पत्रकारिता के मुकाबले खड़ा कर दिया। उनकी स्पष्टवादिता और निर्भीकता ने पत्रकारिता के उन भूले बिसरे मूल्यों की याद दिला दी जिन पर चलकर हिन्दी पत्रकारिता स्वतंत्रता संग्राम की वाहिका बनी थी।

मेरा दोस्त चला गया : उनके मित्र सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी ने कहा कि मेरा और उनका पसंदीदा विषय क्रिकेट रहा है। वो और मैं इस विषय पर खूब चर्चा करते थे। उन्होंने इंदौर और मालवा की पहचान अखिल भारतीय स्तर पर बनाई। बेहिचक व खुलकर लिखा। उन्होंने नए मुहावरे गढ़े। आज मेरा दोस्त चला गया।

हिन्दी के दोनों पत्रकार अनुपस्थित : कवि सरोज कुमार ने कहा कि हिन्दी के दो पत्रकार राजेन्द्र माथुर और प्रभाष जोशी। दोनों ही सहकर्मी एवं अभिन्न मित्र थे। अब दोनों नहीं रहे। उनके जाने से पत्रकारिता का परिदृश्य सूना हो गया। (निप्र)

प्रभाष जोशी पंचतत्व में विलीन
एक निर्भीक पत्रकार का जान
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