मनीष उपाध्याय, इंदौर, शनिवार, 7 नवंबर 2009( 13:08 IST )
इंदौर तो मेरे दिल में बसता है। मैं इसके जज्बे को सलाम करता हूँ। मैं इंदौर को कभी नहीं भूल सकता। भले ही एयरपोर्ट से सीधे महू केंटोनमेंट चले जाते थे, लेकिन इंदौर की धरोहर 10 साल बाद आज भी मेरे पास सुरक्षित है।
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यह भाव-विभोर कर देने वाली बात कारगिल युद्ध के नायक पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वीपी मलिक ने इस प्रतिनिधि से अनौपचारिक चर्चा में कही। शनिवार को शहर में होने वाले आईएमए इंटरनेशनल मैनेजमेंट कॉन्क्लेव 2009 में शामिल होने आए जनरल मलिक कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर सयाजी वाटिका में आयोजित एक अनौपचारिक कार्यक्रम में बातचीत कर रहे थे।
जब इस प्रतिनिधि ने कहा कि कारगिल युद्ध के हीरो का इंदौर शहर में स्वागत है तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि आपके शहर के जज्बे को मैं सलाम करता हूँ। मैं इंदौर को बहुत अच्छे से पहचानता हूँ। आपके शहर की बहुत मीठी याद मेरे दिल में आज भी है।
कारगिल युद्ध के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौरान जब मैं मोर्चे पर था तब आपके शहर की एक विडो लेडी का पत्र मेरे पास आया था। उसने लिखा था- मेरे दो छोटे बच्चे हैं, उन्होंने अपने पिगी बैंक में इकट्ठा किए रुपए सीमा पर लड़ रहे सैनिकों के लिए भेजे हैं। साथ में कुछ एक-एक, दो-दो के नोट थे। मैंने वे रुपए तो बाँट दिए लेकिन 10 साल बाद वह पत्र आज भी मेरे पास है।
त्याग का पाठ पढ़ाया : मालवा की सुहानी ठंडी रात में बज रही बाँसुरी की मीठी धुन के बीच जब जनरल मलिक ने यह बात कही तो साथ में खड़े चंद उद्योगपति भी भावुक हो गए। जनरल मलिक ने कहा कि मुझे उस महिला का नाम याद नहीं आ रहा है। उस महिला ने यह भी लिखा था कि मैं इस त्याग के जरिए अपने बच्चों में देशभक्ति का जज्बा पैदा करना चाहती हूँ।
नागरिक अधिक देशभक्त : बातचीत में उन्होंने बताया कि सीमा पर तनाव के वक्त एक बार इंदौर की बहनों ने सीमा पर तैनात सैनिक भाइयों के लिए रक्षाबंधन पर रक्षासूत्र भी भेजे थे। इस पर जनरल मलिक ने कहा कि इसीलिए कहा जाता है कि 'सिटीजन्स आर मोर पेट्रियोटिक रादर देन पोलिटिशियन्स'। (नईदुनिया)