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मुख पृष्ठ » खबर-संसार » समाचार » राष्ट्रीय » बोफोर्स मामला वापसी की सुनवाई स्थगित (Hearing on Boforce case postponed)
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दिल्ली की एक अदालत ने इतालवी व्यवसायी ओत्तावियो क्वात्रोच्चि के खिलाफ दो दशक पुराने बोफोर्स दलाली मामले को वापस लेने के केन्द्रीय जाँच ब्यूरो के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर शुक्रवार को अपने फैसले को पाँच माह के लिए टाल दिया।

मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कावेरी बावेजा ने फैसले की घोषणा को 31 मार्च 2010 तक के लिए स्थगित कर दिया। उन्हें इस मामले में आज अपना आदेश देना था।

उन्होंने यह कहते हुए फैसले को टाल दिया कि अदालत के पास मूल दस्तावेज नहीं हैं जो उच्चतम न्यायालय को भेजे गए हैं।

अदालत ने 24 अक्तूबर को इस मुद्दे पर अपने फैसले को आज तक के लिए टाल दिया था।

वकील अजय अग्रवाल ने तीन अक्तूबर को सीबीआई के मामला वापस लेने के कदम को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि वह क्वात्रोच्चि के खिलाफ‘पर्याप्त सबूत’होने के बावजूद ‘राजनीतिक रूप से संवेदनशील’मामले को बंद करने की कोशिश कर रही है।

सीबीआई ने इस आधार पर 69 वर्षीय क्वात्रोच्चि के खिलाफ मामले को वापस लेने की अपील की थी कि‘उनके खिलाफ मामला चलाए रखना नाइंसाफी’होगी।

एजेंसी ने कहा कि वह दो मौकों पर मलेशिया और अर्जेन्टीना से उसके प्रत्यार्पण में विफल रहने के बाद मामला वापस लेने के नतीजे पर पहुँची है।

सीबीआई का कहना था कि मामला वापस लेने का आवेदन‘जनहित'में लिया गया है। इसके लिए सीबीआई ने विभिन्न कारणों का हवाला भी दिया जिनमें दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा सभी आरोपियों के खिलाफ आरोपों को रद्द करना भी शामिल था।

अग्रवाल ने सरकारी वकीलों के अधिकार पर इस आरोप के साथ सवाल उठाया था कि सोलिसिटर जनरल (एस जी) गोपाल सुब्रमण्यम और अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल : (एएसजी) पी पी मल्होत्रा विभिन्न अदालतों में एक आरोपी विन चड्ढा का पक्ष रख चुके हैं और आज ये सीबीआई के वकील हैं।

सीबीआई के वकीलों ने अदालत में कहा कि‘ऐसे मामलों में प्रचार और राजनीति के लिए कोई भूमिका नहीं होती और ऐसी याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती। याचिकाकर्ता (वकील) जाँच और अभियोजन प्रक्रिया से अनजान हैं। और इसलिए उनका कोई आधार नहीं बनता।’

अग्रवाल ने यह कहते हुए उनके आवेदन का विरोध किया कि उच्चतम न्यायालय दिल्ली उच्च न्यायालय के एक फैसले के खिलाफ उनकी याचिका को स्वीकार कर पहले ही बोफोर्स मामले में उनके आधार को स्वीकार कर चुका है।

एक अन्य वकील जितेन्द्र सोनी ने भी मामला वापस लेने के सीबीआई के कदम का विरोध करते हुए अदालत में याचिका दाखिल की है।

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा 31 मई 2005 को मामले के बाकी सभी आरोपियों के खिलाफ आरोपों को रद्द किए जाने के बाद क्वात्रोच्चि इस मामले में एकमात्र जीवित आरोपी हैं और वह देश की किसी अदालत में कभी पेश नहीं हुए हैं।(भाषा)
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