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भाजपा ने मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह से सवाल किया कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने वाले जमात ए उलमाए हिन्द के सम्मेलन का बहिष्कार करने की बजाए गृहमंत्री पी. चिदंबरम किस मजबूरी के तहत उसमें शिरकत करने दारूल उलूम देवबंद गए।

पार्टी के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि देश के गृहमंत्री को जब यह मालूम हो गया था कि वंदेमातरम गीत के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने के साथ सोमवार को जमात का सम्मेलन शुरू हुआ है तो वह आज उसमें क्यों शामिल हुए?

उन्होंने कहा कि यह तथ्य जानने के बाद चिदंबरम को सम्मेलन का बहिष्कार करना चाहिए था। लेकिन बहिष्कार करना तो दूर, आज वहाँ दिए अपने भाषण में उन्होंने उस प्रस्ताव के विरोध में एक शब्द तक नहीं कहा।

नकवी ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह और चिदंबरम दोनों को देश को यह बताना होगा कि आखिर वह कौन सी मजबूरी थी, जिसके चलते राष्ट्रीय गीत के विरूद्ध प्रस्ताव पारित करने वाले सम्मेलन में गृह मंत्री को भाग लेना पड़ा?

उन्होंने कहा कि किन्हीं धार्मिक आस्थाओं के कारण वंदे मातरम को गाने की किसी पर जब अनिवार्यता नहीं है तो उसके खिलाफ प्रस्ताव पारित करके करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत करने की क्या आवश्यकता थी? भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेताओं की ऐसी करतूतों से ही अलगाववादियों और आतंकवादियों के हौसले बुलंद होते हैं।

भाजपा के एक अन्य वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने भी प्रस्ताव की कड़ी निंदा करते हुए कहा, कि वंदे मातरम के विरूद्ध कोई फतवा या धार्मिक आदेश स्वीकार्य नहीं होगा। ऐसा करना संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है।

मौलाना महमूद मदनी के नेतृत्व वाले जमात-ए-उलमा के धड़े के सम्मेलन में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि चूँकि वंदेमातरम राष्ट्रीय गीत के कुछ छंदों में भारत की तुलना देवी-देवताओं से की गई है इसलिए यह इस्लाम के एकईश्वरवाद की आस्था के विपरीत है। अत: मुसलमानों को इसे नहीं गाना चाहिए।
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