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संस्थानों की ओर से दी जा रही शिक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के निकट भी नहीं होने के चलते इसकी गुणवत्ता पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने मंगलवार को कहा कि देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में ‘कमियाँ और असंतुलन’ मौजूद है।

सिंह ने पंजाब विश्वविद्यालय से विधि की मानद डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित होने के बाद यहाँ एक विशेष दीक्षांत समारोह में कहा कि हमारे समक्ष जो बड़ी समस्या है, वह हमारे संस्थानों द्वारा दी जाने वाली उच्च शिक्षा की गुणवत्ता की है। दुर्भाग्य से अधिकतर संस्थान ऐसे ‘पास आउट्स’ तैयार कर रहे हैं जो अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के निकट भी नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि अगर देश उच्च पहुँच और पंजीयन के उद्देश्यों को पूरा कर ले, उच्च शिक्षा पर बड़ी राशि खर्च करे और बड़ी संख्या में नए संस्थान खोल ले, तब भी गुणवत्ता का मुद्दा अपने आप हल नहीं होगा।

सिंह ने कहा कि असल में सरकार ने पिछले पाँच वर्ष में जो नए आईआईएम, आईआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालय और अन्य संस्थान स्थापित करने का फैसला किया है, उनमें एक पहलू शीर्ष स्तरीय शिक्षकों की भर्ती में भी गुणवत्ता की कमी की समस्या का है।

उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक को बेहतर शिक्षा तक पहुँच मुहैया कराना सरकार के समक्ष मौजूद एक बड़ा लक्ष्य है। उच्च शिक्षा की मौजूदा स्थिति के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान में किसी भी वर्ष में माध्यमिक शिक्षा पूरी करने वाले महज 12 फीसदी विद्यार्थी ही उच्च शिक्षा के लिए पंजीयन कराते हैं।
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