आईओसी आग, समिति का गठन

जयपुर (भाषा) , मंगलवार, 3 नवंबर 2009( 16:12 IST )
जयपुर के सीतापुरा स्थित इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन (आईओसी) टर्मिनल में लगी आग मंगलवार को छठे दिन भी बुझी नहीं है। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने धुएँ से होने वाले प्रभाव के अध्ययन के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है।
आईओसी डिपो के तीन टैंक से अभी भी धुआँ उठ रहा है और प्रशासन आग बुझने के इंतजार में बचाव कार्य शुरू नहीं कर सका है। आग हादसे से अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है।
हादसे की वजह से गुरुवार से बंद जयपुर सवाई माधोपुर रेल मार्ग पर यातायात आज भी बंद रहा।
जिला कलेक्टर कुलदीप राँका के अनुसार आईओसी डिपों के तीन टैंक से अभी भी धुआँ उठ रहा है और आग बुझने की प्रतीक्षा की जा रही है।
उन्होंने कहा कि आग बुझने के साथ ही बचाव कार्य शुरू किए जाएगे। आईओसी डिपो के पाँच सौ मीटर दायरे को छोड़कर शेष में सलाह के साथ व्यावसायिक कार्य शुरू करने के निर्देश कल ही दिए जा चुके हैं।
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष वीएस सिंह ने आज से कहा कि हादसे से संभावित प्रदूषण का अध्ययन करने के लिए टाटा इंस्टिट्यूट के विशेषज्ञ की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई है, जो आईओसी आग हादसे से जयपुर और आसपास फैले प्रदूषण से बचने और भविष्य में इस तरह की घटनाओं से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए सुझाव देगी।
सिंह ने कहा कि नियंत्रण बोर्ड कानूनी पहलुओं पर काम करता रहा है, लेकिन आईओसी आग हादसे के बाद यह नया पहलू भी शामिल हो गया है। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने आग हादसे से फैले प्रदूषण का अध्ययन करने, इससे बचाव के लिए उठाए जाने वाले कदमों व भविष्य में ऐसी घटनाओं के दौरान प्रदूषण को बिगड़ने से रोकने के लिए सुझाव देने की खातिर कमेटी गठित की है। उन्होंने कहा कि कमेटी जल्दी ही काम शुरू करेगी।
सवाई मानसिंह अस्पताल के अधीक्षक डॉ. नरपतसिंह शेखावत के अनुसार अस्पताल में उपचार करा रहे आग हादसे के घायलों की स्थिति में सुधार हो रहा है।
उन्होंने कहा कि वाटिका क्षेत्र से अस्पताल में उपचार कराने आए यशोदानंद शर्मा की मृत्यु के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में होगा।
यशोदानंद शर्मा को उनके परिजनों ने रविवार रात अस्पताल में साँस लेने की शिकायत के साथ लाए थे। कुछ देर बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। मृतक के परिजन जहरीली गैस से दम घुटने को मौत का कारण बता रहे हैं, जबकि अस्पताल प्रशासन इससे इनकार कर रहा है।