देवबंद (वार्ता), मंगलवार, 3 नवंबर 2009( 10:22 IST )
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योग गुरु बाबा रामदेव मंगलवार को यहाँ जमीयत उलेमा-ए-हिंद के 30वें अधिवेशन के आम जलसे में देशभर से आए मौलवियों को संबोधित करेंगे। यह जानकारी जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय नेता महमूद मदनी ने दी।
जमीयत के राष्ट्रीय सचिव मौलाना नियाज अहमद फारुकी ने बताया कि दारुल उलूम द्वारा योग की हिमायत में दिए गए दारुल उलूम के फतवे ने बाबा रामदेव को बहुत प्रभावित किया है। मलेशिया के उलेमा द्वारा पिछले साल योग को मुसलमानों के लिए प्रतिबंधित कर दिए जाने के बाद दारुल उलूम ने असाधारण फैसला करते हुए मुस्लिमों के लिए योग को जायज करार दे दिया।
स्वामी रामदेव भी इससे सहमत थे कि योग करते वक्त मुस्लिमों के लिए ओम बोलना जरूरी नहीं है। इसके बजाय वे मौन भी रह सकते हैं और अल्लाह का नाम भी ले सकते हैं।
स्वामी रामदेव दारुल उलूम द्वारा आतंकवाद के खिलाफ 25 फरवरी 09 को देवबंद में किए गए जलसे और आतंकवाद को इस्लाम विरोधी घोषित किए जाने संबंधी फतवे से भी प्रभावित हुए। इन दो खूबियों ने उन्हें उलेमा के नजदीक ला खड़ा किया।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के शीर्ष नेता एवं सांसद मौलाना महमूद मदनी और स्वामी रामदेव के बीच एक और जिस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सहमति बनी, वह है स्विस बैंकों में जमा भारतीयों की अकूत दौलत को भारत वापस लाने का केन्द्र सरकार पर संयुक्त रूप से दबाव बनाने का अभियान चलाना।