नई दिल्ली (भाषा), सोमवार, 2 नवंबर 2009( 14:27 IST )
खगोलविद एवं भौतिकशास्त्रियों ने 2012 में पृथ्वी के साथ क्षुद्र ग्रह ‘प्लैनेट एक्स’ की टक्कर और इसके कारण भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, सुनामी से व्यापक विनाश की आशंका व्यक्त की है। यह इतना व्यापक हो सकता है कि इसमें पूरी मानव जाति समाप्त हो सकती है।
जर्मनी के वैज्ञानिक रोसी ओडोनील, विली नेल्सन ने 21 दिसंबर 2012 को प्लैनेट एक्स और पृथ्वी के बीच टक्कर की आशंका व्यक्त की है।
वैज्ञानिकों के अनुसार इस दिन ‘प्लैनेट एक्स एकेए निबिरू’ पृथ्वी के काफी करीब से गुजरेगा, जिसमें चुम्बकीय क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। एक स्थिति में प्लैनेट एक्स पृथ्वी से दूर भी जा सकता है, लेकिन बड़ी संभावना है कि यह पृथ्वी के काफी करीब आए और इसकी टक्कर हो जाए।
जाने माने वैज्ञानिक प्रो. यशपाल ने कहा ब्रह्मांड में हजारों की संख्या में ऐसे क्षुद्र ग्रह और आकाशीय पिंड चक्कर लगा रहे हैं, जो किसी समय पृथ्वी के काफी करीब से गुजरेंगे या उनकी टक्कर होने की आशंका है।
उन्होंने कहा प्लैनेट एक्स के भी 2012 में पृथ्वी के कई हजार किलोमीटर पास से गुजरने का अनुमान लगाया गया है, लेकिन इस बात की कम संभावना है कि प्लैनेट एक्स की पृथ्वी से टक्कर हो।
यशपाल ने कहा अगर टक्कर हुई तो इसकी तीव्रता सबसे बड़े परमाणु विस्फोट से अधिक व्यापक होगी और जिस प्रकार कभी ऐसी ही टक्कर में डायनासोर समाप्त हो गए थे, उसी प्रकार पृथ्वी से मानव जाति समाप्त हो सकती है। हालाँकि इसकी संभावना काफी कम है।
हाल ही में प्रकाशित एक पुस्तक ‘डार्क रेड स्टार ऑन ए कोलिजन कोर्स विद अर्थ’ में प्लैनेट एक्स की पृथ्वी से टक्कर का विस्तृत ब्योरा पेश किया गया है, जिसके कारण पूरी दुनिया के अस्त-व्यस्त होने की बात कही गई है।
ब्रिटिश वैज्ञानिक और लेखक जेक्रियाह सिटचीन ने कहा है कि प्लैनेट एक्स एकेए निबिरू प्लूटो से पृथ्वी की ओर 3,600 वर्ष के अंतराल के बाद आता है, जिसके कारण इसके पृथ्वी से टकराने की आशंका है।
प्लैनेट एक्स की पृथ्वी के साथ टक्कर के कारण निकलने वाली ‘कॉस्मिक किरणों’ के व्यापक प्रवाह के बारे में ‘माया सम्यता’ के कैलेंडर में भी वर्णन किया गया है। इन कॉस्मिक किरणों के बचाव के लिए पिरामिड के निर्माण का उल्लेख है।
प्लैनेट एक्स और पृथ्वी के बीच टक्कर के मद्देनजर कुछ खगोलविदों ने भूकंप आने की बात कही है, जबकि कुछ ने बड़े ज्वालामुखी विस्फोट और सुनामी आने की आशंका जताई है।
उनका कहना है कि इसके कारण पृथ्वी अपनी धुरी से आगे की ओर चली जाएगी। इसके कारण अफ्रीका आगे ध्रुव की ओर और अंटार्कटिका आगे विषुवत रेखा या भूमध्य रेखा की ओर जा सकता है।
इस खगोलीय घटना का उल्लेख सुमेरिया, बेबीलोन और मिस्र की सभ्यता के धार्मिक ग्रंथों में होने की बात भी सामने आई है।