नई दिल्ली (भाषा), बुधवार, 21 अक्टूबर 2009( 19:03 IST )
आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षा में बैठने वाले छात्रों के पात्रता मानक पर सुझाव देने के लिए गठित समिति इस वर्ष दिसंबर तक मानव संसाधन विकास मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट पेश कर सकती है।
आईआईटी परिषद ने आईआईटी की संयुक्त प्रवेश परीक्षा के मानकों में बदलाव और 12वीं कक्षा में पढ़ाई को और अधिक तवज्जो देने का सुझाव दिया है ताकि बच्चे स्कूल की पढ़ाई पर अधिक ध्यान दें और कोचिंग संस्थाओं में जाने के चलन को रोका जा सके।
अभी आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षा में बैठने के लिए पात्रता मानक के तहत 12वीं कक्षा में 60 प्रतिशत अंक जरूरी है। समिति के समक्ष पात्रता मानक में बदलाव का मुद्दा भी है। आईआईटी परिषद की ओर से गठित समिति इन विषयों को ध्यान में रखते हुए सुझाव पेश करेगी।
सूत्रों ने बताया कि इसका एकमात्र उद्देश्य आईआईटी की तैयारी के लिए बच्चों के कोचिंग क्लास जाने के चलन को हत्तोसाहित करना है। उन्होंने कहा कि प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए बच्चों का कोचिंग सेंटरों पर आश्रित होते जाना चिंता का विषय है।
सूत्रों ने बताया कि नई समिति मानव संसाधन विकास मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट इस वर्ष दिसंबर में पेश कर सकती है।
गौरतलब है कि आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षा में बैठने के लिए पात्रता मानक में बदलाव की बात सबसे पहले 2005 में उठी थी। आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर डा. चांडी के नेतृत्व में गठित समिति ने भी इस बारे में सुझाव दिया था
स्कूली और उच्च शिक्षा पर सरकार को महत्वपूर्ण सिफारिश करने वाले शिक्षाविद प्रो. यशपाल ने कहा कि बच्चों के पढ़ाई पर ध्यान देने और कोचिंग संस्थाओं पर नियंत्रण के लिए आदर्श मानक तय करना जरूरी है। इस पर विभिन्न पक्षों से व्यापक सहमति बनाए जाने की जरूरत है।
यशपाल ने कहा कि बच्चे स्कूल की पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे रहे हैं और कोचिंग क्लासों में उनकी रचनात्मकता समाप्त हो रही है। शिक्षा पाठ्यचर्या को काफी मेहनत से तैयार किया गया, इस स्थिति में अगर इस पर अमल नहीं किया जाता है, तो इन कवायदों की उपयोगिता क्या रह जाएगी? हालाँकि, इस संबंध में सभी पक्षों के विचारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
शिक्षा परामर्शक गीतांजली कुमार ने कहा कि हमें सुधार के साथ सीबीएसई बोर्ड और राज्य बोर्ड के पाठ्यक्रम में एकरूपता लानी होगी। इसके लिए सीबीएसई बोर्ड और राज्य बोर्ड के पाठ्यक्रम में सामंजस्य बनना होगा।
उन्होंने कहा कि आदर्श पात्रता मानक निर्धारित करने का प्रयास अच्छा है, क्योंकि बच्चे पढ़ाई पर ध्यान नहीं देकर कोचिंग संस्थाओं की ओर आकर्षित होते हैं, जहाँ उनकी रचनात्मकता समाप्त हो जाती है। ऐसे काफी उदाहरण देखने को मिले हैं जब छात्र बोर्ड परीक्षा में फेल हो जाता है जबकि आईआईटी में सफल रहता हैं।