सत्ता के गलियारे पर अनिल का कब्जा

अंबानी के चक्करों पर सांसद उठाने लगे सवाल
नई दिल्ली, शनिवार, 17 अक्टूबर 2009( 10:26 IST )
-विनोद अग्निहोत्री
अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के खातों की सरकार द्वारा कराई गई विशेष ऑडिट रिपोर्ट के मीडिया में आने के बाद राजनीतिक गलियारों में सरकार के शीर्ष अधिकारियों के साथ एडीएजी के अध्यक्ष अनिल अंबानी की नियमित और लगातार मुलाकातों की चर्चा तेज हो गई है।
पिछले बुधवार भी अनिल दिल्ली आए और प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव टीकेए नायर समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों से उन्होंने मुलाकात की। उधर सीवीसी ने 2008 में दूरसंचार विभाग द्वारा दिए 2 जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस में 60 हजार करोड़ रुपए के घोटाले के आरोपों की जाँच सीबीआई को देने की कार्रवाई से टेलीकॉम उद्योग में हड़कंप है।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि दूरसंचार मंत्री ए. राजा के पिछले कार्यकाल के इस मामले की जाँच से कांग्रेस और डीएमके के रिश्तों में दरार पड़ने के साथ स्पेक्ट्रम लाइसेंस के लाभार्थियों में एक स्वैन टेलीकॉम लि. के पीछे एडीएजी की पूँजी होने की शिकायतें भी जाँच के घेरे में आ सकती हैं।
इस बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा आम है कि देश के तमाम उद्योगपति यदाकदा ही दिल्ली आकर सरकारी अधिकारियों से मिलते हैं। आमतौर पर दिल्ली स्थित उनके जनसंपर्क विभाग के लोग ही सत्ता के गलियारों में मिलते-जुलते हैं। लेकिन अनिल अंबानी देश के शायद अकेले ऐसे शीर्ष उद्योगपति हैं जो नियमित रूप से हर सप्ताह दिल्ली आकर केंद्र के शीर्ष लोगों से मिलते हैं। इनमें मंत्रियों से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय समेत कई मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
आम तौर पर संचार, वित्त, ऊर्जा, वाणिज्य, उद्योग मंत्रालय आदि में उनका ज्यादा आना-जाना है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारी इन मुलाकातों को देश के एक शीर्ष उद्योगपति द्वारा सरकार को अपना बहुमूल्य परामर्श देकर देश की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान देने का तरीका बताते हैं। दिल्ली स्थित एडीएजी के शीर्ष अधिकारी और अनिल के करीबी भी कहते हैं कि अनिल भाई अपने संबंधों को हमेशा ताजातरीन रखते हैं। अपने रिश्तों को वे कभी भूलते नहीं हैं।
उधर कई सांसदों के पत्रों में लगाए गए आरोपों और उठाए गए सवालों से प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय, दूरसंचार विभाग और सीवीसी के अधिकारियों में हलचल है। लोकसभा में वाम मोर्चे के नेता वासुदेव आचार्य, सांसद धर्मपाल सभरवाल, सांसद भरत कुमार राउद द्वारा प्रधानमंत्री, सीवीसी और अन्य संबंधित एजेंसियों को लिखे गए कई पत्रों में एडीएजी समूह की कंपनियों द्वारा अरबों रुपए की विदेशी पूँजी के विनिमय और निवेश का विस्तृत ब्योरा देते हुए उन पर ईसीबी, एफसीसीबी नियमों, फेमा, सेबी के प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। संसद में पूछे गए सवालों के जवाब में सरकार भी एडीएजी की कंपनियों द्वारा ईसीबी और एफसीसीबी नियमों, फेमा और वित्तीय कानूनों के उल्लंघन की बात मान चुकी है।
सरकार के शीर्ष अधिकारियों से एडीएजी अध्यक्ष की नियमित मुलाकातें सियासी हलकों में यह उत्सुकता जरूर जगाती हैं कि आखिर हर सप्ताह सरकार के वरिष्ठ अधिकारी देश के इस शीर्ष उद्योगपति से क्या परामर्श लेते हैं, जिसे सरकार को देने के लिए दूसरे बड़े उद्योगपतियों के पास फुर्सत नहीं है या फिर सरकार के अधिकारियों के पास उनके लिए समय नहीं है।
हालाँकि रिलायंस कम्युनिकेशंस के खातों की सरकार द्वारा कराए गए विशेष ऑडिट से उठे विवाद पर अनिल अंबानी ने कहा है कि यह सब उनके कॉर्पोरेट विरोधियों द्वारा एडीएजी को बदनाम करने की साजिश है। अनिल के मुताबिक मीडिया में उनके समूह के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। एडीएजी को लेकर उठने वाले सवालों पर "नईदुनिया" ने एडीएजी के दिल्ली स्थित प्रवक्ता से पिछले कई दिनों से लगातार संपर्क करने की कोशिश की। व्यक्तिगत मुलाकात, टेलीफोन और ईमेल के जरिए उनसे उनका पक्ष माँगा गया लेकिन यह खबर लिखे जाने तक एडीएजी ने अपने जवाब नईदुनिया को नहीं भेजे।
अपने समूह पर उठ रहे सवालों पर एडीएजी अध्यक्ष की सार्वजनिक प्रतिक्रिया स्वाभाविक है, लेकिन एडीएजी कंपनियों की उपकंपनियों के खातों से अरबों रुपए की विदेशी पूँजी के हस्तांतरण पर इंग्लैंड और स्विट्जरलैंड प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा माँगी गई जानकारी, एडीएजी की कंपनी पर रिजर्व बैंक द्वारा लगाए गए करीब सवा सौ करोड़ रुपए के जुर्माने, विशेष ऑडिट रिपोर्ट में ऑरकाम के राजस्व आँकड़ों में गड़बड़ी पाए जाने और शेयर वारंट जारी करने के मामलों को उच्च न्यायालय द्वारा सेबी को सौंपने के तथ्यों को अनदेखा कैसे किया जा सकता है।
इसके साथ ही एडीएजी की दादरी बिजली परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को अदालत में मिली चुनौती और परियोजना शुरू होने में अनिश्चय, दिल्ली में बिजली वितरण करने वाली एडीएजी की कंपनी बीएसईएस के मीटरों में गड़बड़ी की शिकायतों, आरोपों की जाँच के दबाव में कंपनी के सीईओ को बदल देने, एयर इंडिया के इंश्योरेंस के ठेके को एडीएजी की कंपनी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस को दिए जाने के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी न्यू इंडिया इंश्योरेंस द्वारा सीवीसी को भेजी शिकायत में उठे सवाल भी किसी से छिपे हुए नहीं हैं।
इनसे है नियमित मुलाकात-
1. कैबिनेट सचिव एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी
2. प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव एवं अन्य अधिकारी
3. वित्त मंत्रालय के अधिकारी
4. संचार मंत्रालय के अधिकारी
5. कानून मंत्रालय के अधिकारी
6. ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारी
7. पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारी
8. वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी
9. उद्योग मंत्रालय के अधिकारी
10. भूतल परिवहन मंत्रालय के अधिकारी