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चंद्रमा के लिए भारत का दूसरा अभियान ‘चंद्रयान द्वितीय’ के 2013 तक प्रक्षेपित किए जाने की उम्मीद है और वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों के लिए यह काफी चुनौतीपूर्ण होगा। यह बात अभियान के निदेशक एम अन्नादुरै ने कही।

मध्य मुंबई के सायन में साउथ इंडियन एडुकेशन सोसायटी के छात्रों के साथ बातचीत करते हुए अन्नादुरै ने कहा कि चंद्रयान द्वितीय सिर्फ प्रयोग ही नहीं होगा। वह चंद्रमा पर उतरेगा और भारतीय वैज्ञानिकों के लिए तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि चंद्रयान प्रथम के वैज्ञानिक चंद्रयान द्वितीय में भी शामिल होंगे और विदेशों से भी वही लोग अभियान में शामिल होंगे, जो चंद्रयान प्रथम में शामिल थे।

उन्होंने कहा कि रूस जैसे देशों ने भी इसमें रूचि दिखाई है और रूस के चंद्रयान द्वितीय अभियान में शामिल होने का मौका है।

अन्नादुरै ने कहा कि चंद्रमा के लिए अब तक 70 अभियान हो चुके हैं और चंद्रयान प्रथम अलग था, क्योंकि इसमें 11 वैज्ञानिक उपकरण एवं 60 डिटेक्टर थे। उन्होंने कहा कि चंद्रयान प्रथम जैसा अभियान आर्थिक रूप से निर्वहन करने योग्य है क्योंकि इसरो के वैज्ञानिक आक्रामक प्रारूपों का प्रयोग करते हैं।
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