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मुख पृष्ठ » खबर-संसार » समाचार » राष्ट्रीय » चंद्रयान ने खोजा चाँद पर पानी (Chandrayan Porbes water on Moon)
 
वैज्ञानिकों ने गुरुवार को घोषणा की कि भारत के पहले चंद्र मिशन चंद्रयान 1 ने चाँद की सतह पर पानी की मौजूदगी के प्रमाण खोज निकाले हैं। चंद्रयान 1 के साथ भेजे गए नासा के उपकरण ‘मून मिनरलोजी मैपर (एम.3)’ ने परावर्तित प्रकाश की तरंगदैध्र्य (वेवलेंग्थ)का पता लगाया जो उपरी मिट्टी की पतली परत पर मौजूद सामग्री में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक संबंध का संकेत देता है।

चंद्रयान 1 द्वारा जुटाए गए विवरण का विश्लेषण कर एम 3 ने चंद्रमा पर पानी के अस्तित्व की पुष्टि कर दी है। इस खोज ने चार दशक से चले आ रहे इन कयासों पर विराम लगा दिया है कि चंद्रमा पर पानी है या नहीं। वैज्ञानिकों ने पहले दावा किया था कि चंद्रमा पर लगभग 40 साल पहले पानी का अस्तित्व था।

यह दावा उन्होंने अपोलो अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा स्मृति के रूप में धरती पर लाए गए चंद्र चट्टानों के नमूनों के अध्ययन के बाद किया था लेकिन उन्हें अपनी इस खोज पर संदेह भी था क्योंकि जिन बक्सों में चंद्र चट्टानों के अंश लाए गए उनमें रिसाव हो गया था। इस कारण ये नमूने वातावरण की वायु के संपर्क में आकर प्रदूषित हो गए थे।

वैज्ञानिकों का मानना है कि नाभिकीय विखंडन के परिणामस्वरूप चंद्रमा पर चट्टानों और मिट्टी में मौजूद ऑक्सीजन की प्रोटोन्स के रूप में सूर्य द्वारा उत्सर्जित हाइड्रोजन के साथ हुई अंत:क्रिया से पानी बना होगा।

एम 3 वैज्ञानिकों की टीम में से एक टेनेसी यूनिवर्सिटी के लैरी टेलर ने कहा कि जैसे ही ये प्रोटोन चंद्रमा से टकराते हैं वे ऑक्सीजन को मृदा तत्वों से अलग कर देते हैं । जहाँ स्वतंत्र ऑक्सीजन और हाइड्रोजन एक साथ होते हैं वहाँ इस बात का पता लगाने के अधिक अवसर होते हैं कि वहाँ पानी बनेगा।

एम 3 उपकरण ने पानी के तत्वों की पहचान के लिए इस बात का विश्लेषण किया कि चंद्रमा की सतह पर सूर्य का प्रकाश किस तरह परावर्तित होता है जिसमें वैज्ञानिकों ने पानी जैसे रासायनिक संबंधों वाले तत्वों को पाया। हालाँकि यह उपकरण चंद्र सतह की अत्यंत उपरी परतों को ही देख सकता है..शायद सतह के कुछ सेंटीमीटर नीचे भी देख सकता है।

वैज्ञानिकों ने विभिन्न खनिजों की विभिन्न तरंदैध्र्य में परावर्तित प्रकाश का अध्ययन किया और इन अंतरों का इस्तेमाल यह जानने के लिए किया कि उपरी मिट्टी की पतली परत में क्या मौजूद है।

टेलर और एम 3 टीम के अन्य सदस्यों का मानना है कि उनकी खोज का खास महत्व है क्योंकि चंद्रमा पर जाने की मानव की इच्छा लगातार बनी हुई है। एम 3 द्वारा तैयार किए गए चंद्रमा के नक्शे मिशन योजनाकारों को चंद्रमा की मिट्टी से पानी निकालने के लिए अहम ठिकानों की स्थिति उपलब्‍ध करा सकते हैं। यह खोज साइंस एक्सप्रेस जर्नल के इस सप्ताह के ऑनलाइन संस्करण में प्रकाशित होगी।

चन्द्रयान.1 के लिए मील का पत्थर:भारत के चन्द्रयान 1 अभियान द्वारा चन्द्रमा पर पानी के सबूतों की खोज को मील का पत्थर करार देते हुए इसरो के अध्यक्ष जी माधवन नायर ने गुरुवार को कहा कि अभी तक किसी भी चन्द्र अभियान में सकारात्मक निष्कर्ष नहीं मिल पाए थे।

उन्होंने कहा, ‘पानी के सबूत मिलने की पुष्टि हुई है। जहाँ तक चन्द्रयान1 अभियान की बात है, यह मील का पत्थर साबित हुआ है। अभी तक कोई भी अभियान सकारात्मक रूप से जल की मौजूदगी को साबित नहीं कर पाया था।’

इस संबंध में आँकड़े देने वाला प्रमुख उपकरण नासा मून मिनेरोलाजी मैपर था जिसे भारत के पहले चन्द्र अभियान पर लगाया गया था। इसके अलावा चन्द्रयान में हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजर और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का मून इंपेक्ट प्रोब भी लगाया गया था।

उन्होंने बताया कि आँकड़ों का विश्लेषण अमेरिका की जेट प्रोपल्सन लेबोरेटरी तथा भारत की फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी और स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के वैज्ञानिकों ने किया।

नायर ने बताया कि इसरो इस संबंध में औपचारिक घोषणा और विस्तृत विश्लेषण कल जारी करेगा। इससे पूर्व चन्द्रयान की खोज का खुलासा एक विज्ञान पत्रिका में किया जायेगा और नासा के वैज्ञानिक इस संबंध में घोषणा करेंगे।

चन्द्रयान 1 को पिछले साल अक्तूबर में प्रक्षेपित किया गया था और इसे दो साल तक अध्ययन करना था लेकिन पिछले माह इस अभियान को अचानक बंद करना पड़ा। नायर अपनी इस बात पर कायम हैं कि अभियान ने अपने 95 प्रतिशत उद्देश्यों को हासिल कर लिया है।
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