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हत्वाकांक्षी चंद्रयान-1 परियोजना के अचानक खात्मे के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र ने अपने पहले सफल अभियान में 20 मिनट के समयकाल में भारतीय उपग्रह ओशनसैट-2 समेत सात उपग्रहों को कक्षा में स्थापित कर दिया।

51 घंटे की उल्टी गिनती के बाद 44.4 मीटर लंबे और चार चरण वाले अंतरिक्षयान पीएसएलवी-सी14 यहाँ सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से अंतरिक्ष के अपने सफर पर रवाना हुआ। उसने एक के बाद एक सभी उपग्रह कक्ष में स्थापित कर दिए।

आसमान साफ था और आज सुबह 11 बजकर 51 मिनट पर जैसे ही पीएसएलवी ने पूरे आन-बान के साथ आकाश का रुख किया वैज्ञानिकों में हर्षोल्लास की लहर फैल गई। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए वहाँ मौजूद थे।

ओशनसैट देश का 16वाँ दूरसंवेदी उपग्रह है और यह मछली पकड़ने के संभावित क्षेत्रों की निशानदेही करने के साथ ही समुद्र की स्थिति की भविष्यवाणी करेगा और तटीय क्षेत्रों के अध्ययन में मदद करेगा। यह मौसम की भविष्यवाणी और जलवायु अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण सूचनाएँ देगा। कक्षा में स्थापना के इस सफर में ओशनसैट के साथ छह नैनो उपग्रहों की एक श्रृंखला भी थी।

सफल प्रक्षेपण के तुरंत बाद अभियान केन्द्र में मौजूद अंसारी और वरिष्ठ वैज्ञानिक एमजीके मेनन ने इसरो के वैज्ञानिकों को बधाइयाँ दीं।

अंतरिक्ष के इस सफर में ओशनसैट के साथ दो जर्मन रूबिन नैनो उपग्रहों के अलावा चार क्युबसैट भी थे।

ओशनसैट-2 कक्षा में ओशनसैट-1 की जगह लेगा। ओशनसैट-1 का उपयोग समुद्र विज्ञान के भौतिक और जीव वैज्ञानिक पहलुओं के अध्ययन के लिए किया गया है। ओशनसैट-2 का अभियान जीवन पाँच साल का होगा।

ओशनसैट ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दस साल पूरे किए। ओशनसैट-2 का हमसफर बने नैनो उपग्रहों का वजन दो से आठ किलोग्राम के बीच था। ये यूरोपीय विश्वविद्यालयों के शैक्षिक उपग्रह हैं और इनका उपयोग नई प्रौद्योगिकियों के परीक्षण के लिए होगा।

अधिकारियों ने बताया कि सबसे पहले ओशनसैट-2 को कक्षा में स्थापित किया गया। इसके बाद एक-एक करके अन्य उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

ओशनसैट-2 में रखे गए 8 बैंड ओशन बैंड मॉनीटर, 360 मीटर के रिजोल्युशन के साथ 1420 किलोमीटर की पट्टी की तस्वीर देगा। यह वर्णक्रम के विद्युतचुंबकीय दृश्य एवं इन्फ्रारेड क्षेत्रों में काम करेगा। स्कैटरोमीटर अनवरत काम करेगा।

राष्ट्रपति ने दी बधाई : राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने छह यूरोपीय नैनो सैटेलाइट के साथ ओशनसैट-2 के प्रक्षेपण के लिए इसरो के दल को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पूरे देश के लिए गौरव का क्षण है क्योंकि वैज्ञानिकों ने उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया है।
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