नई दिल्ली (भाषा), बुधवार, 22 जुलाई 2009( 00:40 IST )
दूरवर्ती परिणाम वाले अपने एक आदेश में उच्चतम न्यायालय ने मानसिक रूप से विक्षिप्त बलात्कार की शिकार महिला को यह कहते हुए अपने बच्चे को जन्म देने की अनुमति दी कि कुदरत उनका बचाव करेगी।
प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा संचालित नारी निकेतन में बलात्कार की शिकार हुई 19 वर्षीय महिला के गर्भपात के पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश को खारिज करते हुए कहा हम गर्भपात के पक्ष में नहीं हैं।
न्यायाधीश पी. सदाशिवम और बीएस चौहान की सदस्यता वाली पीठ ने अपने संक्षिप्त आदेश में कहा हम उच्च न्यायालय के आदेश के कार्यान्वयन पर रोक का आदेश देते हैं।
पीड़ित महिला पर लगातार नजर रखने की जरूरत संबंधी मनोचिकित्सक और महिला रोग विशेषज्ञ के बयान पर संज्ञान लेते हुए पीठ ने कहा यदि यही गारंटी है तो गर्भपात की क्या जरूरत है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कुदरत खुद उनका ध्यान रखेगी। उच्चतम न्यायालय के इस आदेश ने बंबई उच्च न्यायालय के बीते साल के उस आदेश की याद ताजा कर दी है, जिसमें अदालत ने उस महिला को अपने बीस सप्ताह से ज्यादा के गर्भ का गर्भपात कराने की अनुमति नहीं दी थी, जिसे अपने बच्चे के जन्म में जटिलताओं का अंदेशा था।