एक लंबित आपराधिक मामले में मद्रास उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश को केंद्रीय मंत्री द्वारा फोन किए जाने के मुद्दे ने नया मोड़ ले लिया है।
प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने कहा कि न्यायाधीश ने खुली अदालत में जो कहा था उसके विपरीत किसी भी राजनीतिज्ञ ने न्यायाधीश को फोन नहीं किया।
उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने एक अखबार में छपे साक्षात्कार में कहा कि किसी भी मंत्री ने न्यायाधीश आर. रघुपति को फोन नहीं किया और उन्हें मालूम हुआ है कि एक वकील ने दावा किया कि कुछ मंत्री मामले में रुचि ले रहे हैं।
न्यायाधीश बालाकृष्णन से संपर्क नहीं हो सका, लेकिन उनकी टिप्पणी ने न्यायाधीश रघुपति की टिप्पणी से उत्पन्न विवाद को नया मोड़ दे दिया है। रघुपति ने पिछले हफ्ते एक खुली अदालत में कहा था कि दो अभियुक्तों को अग्रिम जमानत के लिए एक केंद्रीय मंत्री ने उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की।
प्रधान न्यायाधीश ने घटना पर कड़ा नोटिस लिया और ऐसी घटना को न्यायपालिका में हस्तक्षेप बताया था। |