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रुखसाना के लिए जिंदा हैं कैप्टन थापर!
कारगिल संघर्ष के समय शहीद हुए कैप्टन विजयंत थापर भले ही इस संसार में नहीं हों लेकिन कश्मीर के एक सुदूरवर्ती गाँव की 16 वर्षीय रुखसाना के लिए थापर अब भी जिंदा हैं।

उत्तरी कश्मीर में कुपवाड़ा जिले के एक स्कूल में नौवीं कक्षा की रुखसाना कारगिल संघर्ष के बाद मरणोपरांत वीर चक्र से नवाजे गए कैप्टन थापर को अपने मसीहा के तौर पर आज भी याद करती है।

उन्हें याद करते हुए वह कहती है कि उस लंबे शख्स के साथ स्कूल परिसर में वह खेलती थी और उन्होंने उसे चॉकलेट दिए।

कैप्टन थापर ने अपने परिवार को लिखे अंतिम पत्र में कहा था कि कुपवाड़ा की इस लड़की को नियमित तौर पर 50 रुपये भेजते रहें।

थापर की पहली नियुक्ति 2 राजपूताना राइफल्स में हुई थी और कुपवाड़ा के एक सैन्य शिविर के पास एक स्कूल में पाँच वर्षीय रुखसाना से उनकी मुलाकात हुई थी।

कैप्टन थापर ने अपने अंतिम पत्र में लिखा था- 'जब आपको यह पत्र मिलेगा मैं आपको अप्सराओं के बीच में से आसमान से निहारूँगा। कुछ धन अनाथों को दान दें और रुखसाना को हर महीने 50 रुपये देते रहें।

उनके पिता कर्नल (सेवानिवृत्त) वीएन थापर याद करते हुए कहते हैं कि हम रोबिन की यादों को बनाए रखना चाहते हैं और रुखसाना को बड़े होते देखना चाहते हैं। कैप्टन थापर के परिजन उन्हें रोबिन नाम से ही पुकारते थे।
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