बाबरी मस्जिद विध्वंस की जाँच करने वाले लिब्रहान आयोग के पूर्व वकील अनुपम गुप्ता ने कहा है कि भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी न्यायमूर्ति एम एस लिब्रहान की कमजोर नस हैं।
शुरूआती जानकारी से इस बात के संकेत मिले हैं कि पूर्व उप प्रधानमंत्री उन लोगों में शामिल नहीं हैं जिन्हें ‘व्यक्तिगत तौर पर आरोपित’ किया गया है।
गुप्ता ने ‘आउटलुक’ पत्रिका को दिए गए साक्षात्कार में कहा कि यह प्रकट है कि वह (न्यायमूर्ति लिब्रहान) आडवाणी को बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले से मुक्त करना चाहते थे।
आडवाणी को लेकर न्यायमूर्ति एम एस लिब्रहान के रवैए को लेकर मतभेद के कारण दो साल पहले आयोग से नाता तोड़ लेने वाले गुप्ता ने कहा,‘न्यायमूर्ति लिब्रहान के साथ एक दशक तक जुड़े रहने के आधार पर मेरा मानना है कि आडवाणी उनकी कमजोर नस हैं।’
उन्होंने कहा, ‘रिपोर्ट में आडवाणी के बारे में चाहे जो कहा गया हो लेकिन मैं इस बारे में दृढ़तापूर्वक यही कहूँगा।’उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति लिब्रहान की रिपोर्ट की असली परीक्षा आडवाणी की भूमिका और बाबरी मस्जिद विध्वंस में उनकी जिम्मेदारी के संबंध में उनके विश्लेषण को लेकर होगी।
गुप्ता ने कहा कि शुरूआती मीडिया रिपोर्ट और अन्य सूचनाओं से पता चलता है कि जहाँ संघ परिवार के अन्य अग्रणी नेताओं को व्यक्तिगत तौर पर आरोपित किया गया है वहीं ऐसा लगता है कि आडवाणी उनमें नहीं हैं। |