वयस्कों के बीच परस्पर सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को वैध घोषित ठहराए जाने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले पर लोगों की मिश्रित प्रतिक्रिया हो रही है। कुछ इसे महान फैसला करार दे रहे हैं तो कुछ एक ही लिंग के लोगों के बीच संबंधों को अप्राकृतिक तथा भारतीय संस्कृति के खिलाफ बता रहे हैं।
इतना ही नहीं इस मुद्दे पर लोगों के बीच साइबर युद्ध भी छिड़ गया है और वे इस संबंध में ब्लॉग तथा मीडिया वेबसाइटों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं।
महाराष्ट्र के ठाणे से एक व्यक्ति ने लिखा है कि अदालत का फैसला सभी व्यक्तियों को गरिमा प्रदान करेगा। एक अन्य व्यक्ति ने इसे महान फैसला करार देते हुए लिखा है कि इससे प्रत्येक व्यक्ति स्वतंत्र रहेगा और वह अपनी स्वतंत्र इच्छा के अनुरूप जीवन व्यतीत कर सकेगा।
एक अन्य व्यक्ति ने लिखा है कि समलैंगिक संबंधों को बहुत देर से वैध घोषित किया गया है। पूरी दुनिया में लोगों द्वारा समलैंगिकों को स्वीकार किया जा रहा है तो फिर भारत में क्यों नहीं?
ऐसे भी बहुत से लोग हैं जो समलैंगिकता को अप्राकृतिक, धर्म विरोधी और भारतीय संस्कृति के खिलाफ बता रहे हैं। बहुत सी टिप्पणियों में समलैंगिक स्त्री और समलैंगिक पुरुष समुदाय के लोगों के लिए गाली जैसी भाषा का भी इस्तेमाल किया गया है। एक व्यक्ति ने कहा कि हमारी संस्कृति ने इस तरह की गतिविधियों को कभी स्वीकार नहीं किया। फैसले से नाराज एक अन्य व्यक्ति ने सवाल किया कि बहु विवाह और बहु पतित्व को भी अपराध की श्रेणी से बाहर क्यों नहीं कर देते या इसे भी वैध क्यों नहीं बना देते? इसमें भी वयस्कता को शामिल कीजिए।
इस मुद्दे पर छिड़े साइबर युद्ध में समलैंगिक कार्यकर्ताओं ने इस तर्क का कड़ा विरोध किया है कि एक ही लिंग के लोगों के बीच संबंधों को जायज ठहराए जाने से भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुँचेगा।
समलैंगिक संबंधों के समर्थक एक व्यक्ति ने लिखा है कि जो लोग यह कहते हैं कि इससे भारतीय संस्कृति ‘नष्ट’ होगी उन लोगों को मैं सलाह देना चाहूँगा कि भारतीय संस्कृति में समलैंगिकता के इतिहास को देखें। यदि आप फिर भी कहते हो कि इससे भारतीय संस्कृति नष्ट होगी तो जब सती प्रथा का अंत हुआ तो क्या उससे संस्कृति नष्ट नहीं हुई?
एक अन्य व्यक्ति ने लिखा है कि समलैंगिक लोग किसी दूसरे ग्रह से नहीं आए हैं। यह कोई भी हो सकते हैं, आपके भाई, बहन, सहकर्मी, आपके बच्चों का इलाज करने वाले डॉक्टर, आपकी कार चलाने वाले चालक और वे निर्देशक, जो आपके लिए पसंदीदा फिल्म बनाते हैं।
कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने टिप्पणी करने में बीच का रास्ता अपनाया है। नवी मुम्बई से एक व्यक्ति ने लिखा है कि जो लोग समलैंगिकता को गलत नहीं मानते, उन्हें अदालत के फैसले का सम्मान करना चाहिए और जो इसके विरोध में हैं, उन्हें उच्चतम न्यायालय में अपील दायर करनी चाहिए। |