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निजी स्कूलों में गरीबों को रिजर्वेशन!
मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने गुरुवार को शिक्षा में सुधार के लिए परामर्श प्रक्रिया को शुरू करते हुए निजी स्कूलों में गरीब छात्रों के लिए 25 फीसदी कोटा लागू करने की अपनी सरकार की प्रतिबद्धता का जिक्र किया।

सिब्बल ने यहाँ स्कूलों के प्राचार्यों से बात करते हुए कहा कि संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को शिक्षित बनाए, क्योंकि वर्ष 2020 तक देश में 4.7 करोड़ अतिरिक्त छात्र होने का अनुमान लगाया गया है।

संसद में लंबित ‘शिक्षा का अधिकार विधेयक’ में कमजोर तबके के बच्चों के लिए 25 फीसदी सीट आरक्षित रखने की माँग की गई है। विधेयक में कहा गया है कि सरकार इन गरीब बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाएगी।

इस संबंध में कुछ प्राचार्यों द्वारा इससे उन पर अतिरिक्त व्यय भार पड़ने के बारे में व्यक्त की गई आशंका पर सिब्बल ने कहा कि सरकार इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत ही उनके बोझ कम करने की व्यवस्था करेगी।

उन्होंने कहा हम यह सुनिश्चित करेंगे कि गरीब और कमजोर तबकों के बच्चे शिक्षा हासिल कर सके। हम प्रावधानों के मुताबिक एक क्षतिपूरक तंत्र बनाएँगे।

सिब्बल ने यह भी कहा कि सभी तबके के लोगों को शिक्षा और कौशल सुनिश्चित करने के लिए प्राचार्यों को कुछ बलिदान देना होगा। उन्होंने कहा कि संसाधनों का पूरा उपयोग करने के लिए सरकार स्कूलों में दो पाली में पठन-पाठन का कार्य कराने के विकल्प पर भी विचार कर सकती है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गरीब तबके के बच्चों के लिए 25 फीसदी कोटा की व्यवस्था एक विवादास्पद मुद्दा है, क्योंकि निजी स्कूल इस पहल का विरोध कर रहे हैं।

कुछ प्राचार्यों ने कोटा लागू करने के लिए आज सरकार से और अधिक समर्थन की माँग की। हालाँकि, सुधारों के प्रति सरकार की पहल का प्राचार्यों ने स्वागत किया है।

इस बीच संस्कृति स्कूल की प्राचार्य आभा सहगल ने कहा गरीब छात्रों के प्रति हरेक स्कूल की एक सामाजिक जिम्मेदारी है। हम चर्चा कर इस बात का हल ढूँढेंगे कि गरीब छात्रों के लिए कोटे को किस तरह से लागू किया जाए।

डीपीएस आरके पुरम की प्राचार्य श्यामा चोना ने कहा कि 10वीं कक्षा से बोर्ड की परीक्षा हटाने की योजना शिक्षा व्यवस्था को आसान बना सकती है।

सिब्बल ने कहा कि कौशल आधारित प्रशिक्षण देने के लिए सरकारी और नगर निगम के स्कूलों में दो पालियों में पढ़ाई की व्यव्स्था की जा सकती है। उन्होंने कहा कि नगर निगम के स्कूलों की अपनी कक्षाओं के बाद शिक्षा उपलब्ध कराने में रुचि रखने वाले निजी निकाय इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

सिब्बल ने भरोसा दिलाया कि ‘शिक्षा का अधिकार विधेयक’ के पारित होने के तीन साल बाद स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार होगा।
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