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127 देशों में वैध है समलैंगिकता
दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा गुरुवार को समलैंगिकता को वैध ठहराए जाने के बाद भारत इसे वैध मानने वाला दुनिया का 127वाँ देश बन गया, जबकि 80 देश अभी भी इसे अपराध की श्रेणी में रखते हैं।

समलैंगिकता को कानूनी मान्यता देने की प्रक्रिया 1989 में डेनमार्क से शुरू हुई थी। वह पहला देश था, जिसने समलैंगिक जोड़ों को विवाहित दंपति के बराबर का दर्जा दिया था। इसके बाद कुछ अन्य यूरोपीय देशों ने उसका अनुकरण किया था।

इसके सात वर्ष बाद, नार्वे, स्वीडन और आइसलैंड ने 1996 में और फिनलैंड ने छह साल बाद इस आशय के कानून बनाए।

नीदरलैंड वह पहला देश रहा, जिसने समलैंगिक जोड़ों को 2001 में पूर्ण विवाह अधिकार प्रदान किया। बेल्जियम ने 2003 में समलैंगिक विवाहों को मंजूरी दी, जबकि स्पेन ने जून 2005 में समलैंगिक जोड़ों को विवाह का अधिकार दिया।

कनाडा ने भी 2005 में ही इन विवाहों को वैध ठहराया। न्यूजीलैंड ने 2004 में समलैंगिक जोड़ों के बीच विवाह को मान्यता दी और दक्षिण अफ्रीका ने 2005 में समलैंगिकों के संबंध को सही ठहराया।

अर्जेंटीना में समलैंगिक संबंध का पहला मामला 2003 में हुआ और वह लातिनी अमेरिका का इस तरह के संबंधों को मान्यता देने वाला पहला देश बन गया।

दिसंबर 2007 में नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को उन कानूनों को समाप्त करने का निर्देश दिया, जो समलैंगिकों के खिलाफ भेदभाव करते थे।
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