मुख पृष्ठ > खबर-संसार > समाचार > राष्ट्रीय > धार्मिक नेताओं ने फैसला खारिज किया
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजिएयह पेज प्रिंट करें
 
धार्मिक नेताओं ने फैसला खारिज किया
वयस्कों के बीच सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को वैध घोषित किए जाने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को कुछ धार्मिक नेताओं ने खारिज कर दिया है।

जामा मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी ने कहा कि समलैंगिकता को वैध बनाना बिल्कुल गलत है। हम ऐसे किसी कानून को स्वीकार नहीं करेंगे।

उन्होंने समलैंगिकता को अपराध मानने वाली धारा 377 को खत्म करने के लिए भारतीय दंड संहिता में संशोधन के प्रयास के लिए सरकार की आलोचना की।

बुखारी ने कहा ‘यदि सरकार धारा 377 को खत्म करने के लिए कोई प्रयास करती है तो हम इसका कड़ाई से विरोध करेंगे।’

अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद राशिद फिरंगी माहली ने कहा कि समलैंगिकता को किसी भी धर्म में मंजूरी नहीं दी गई है।

उन्होंने कहा ‘यह सभी धर्मों के खिलाफ है। यह भारतीय समाज की संस्कृति के खिलाफ है । हमारा मानना है कि समलैंगिकता को वैध बनाए जाने की कोई जरूरत नहीं है। यह अप्राकृतिक है। इसे लगातार आपराधिक कृत्य माना जाना चाहिए।'

फादर डामिनिक इमान्यूल ने कहा कि चर्च को समलैंगिकता के अपराध की श्रेणी से बाहर करने में कोई आपत्ति नहीं है लेकिन इसे वैध नहीं बनाया जाना चाहिए।

इमान्यूल ने कहा ‘हमें समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर किए जाने में कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि हम ऐसे लोगों को अन्य अपराधियों जैसा नहीं मानते लेकिन चर्च समलैंगिक संबंधों को भी नैतिक रूप से सही नहीं मानता।’

उन्होंने कहा‘यह प्रकृति के खिलाफ है। इसे वैध नहीं किया जाना चाहिए। इस तरह की चीजों से बच्चों के यौन शोषण तथा एचआईवी और एड्स के संक्रमण के मामलों में वृद्धि होगी।’
संबंधित जानकारी खोजें
और भी
शिक्षा में सुधार पर जोर
भारतीय कर प्रणाली सुधरे:समीक्षा
कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर जोर
विदेशी निवेशकों के लिए आसान होगा रास्ता
श्रम कानूनों की समीक्षा की वकालत
कंपनियों की 10 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का सुझाव