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श्रम कानूनों की समीक्षा की वकालत
सरकार ने श्रम कानूनों और श्रम बाजार विनियमों की समीक्षा करने पर जोर दिया है और कहा है कि उद्योगों की वृद्धि को सुगम बनाने के लिए यह जरूरी है।

संसद में गुरुवार को पेश आर्थिक समीक्षा में कहा है कि यह विनिर्माण रोजगार गतिविधियों को बदलने के लिए आवश्यक है।

समीक्षा में कहा गया है कि वैश्विक वित्तीय संकट के कारण अक्टूबर-दिसंबर 2008 के दौरान भारत में विशेषकर रत्न एवं आभूषण, ऑटोमोबाइल तथा कपड़ा क्षेत्र में लगभग पाँच लाख रोजगार खत्म हो गए। रोजगार में इजाफे के लिए श्रम कानून में सुधारों का सुझाव दिया गया है।

सरकार ने इसी तरह अनेक क्षेत्रों को कच्चे माल की कमी का जिक्र भी समीक्षा में किया है। इसमें कहा गया है कि कोयला, लौह अयस्क, प्राकृतिक गैस और वानिकी संसाधन जैसे कच्चे माल की गंभीर कमी का असर अनेक उद्योगों की वृद्धि पर पड़ता है।

इसके अनुसार भारतीय उद्योग मंदी के सबसे बुरे दौर से शायद निकल गया है और सुधार की ओर लौट रहा है। बिजली उत्पादन में बढ़ोतरी, सीमेंट उत्पादन में वृद्धि तथा बैंकिंग ऋण में उठाव इस बात का संकेत है।
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