देशभर के दूर-दराज के इलाकों में चिकित्सा सुविधाएँ पहुँचाने के लिए सरकार अब दुगनी तनख्वाह देकर ठेके पर डॉक्टर रखेगी। ...और क्या कहता है एजेंडा | एम्स जैसे आठ संस्थान खुलेंगे | मानव संसाधन परिषद जैसी इकाई | 18 मेडिकल संस्थानों का विकास | मेडिकल व डेंटल काउंसिल के लिए नियामक इकाई | कसौली तथा कन्नूर जैसी संस्थाओं का आधुनिकीकरण | नकली दवाओं से बचने के लिए स्वायत्त निकाय | केंद्रीय दवा प्राधिकरण बनेगा | केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलामनबी आजाद ने बुधवार को यहाँ अपने मंत्रालय के सौ दिन के एजेंडे का खुलासा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत राज्य सरकारों की मदद से कठिन दुरूह तथा अति दुरूह क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें चिकित्सक, अर्द्धचिकित्सक, उपकरण तथा दवाएँ आदि उपलब्ध कराने के लिए हर संभव मदद दी जाएगी।उन्होंने कहा कि दूरदराज के क्षेत्रों खासतौर पर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल तथा पूर्वोंत्तर जैसे क्षेत्रों में डॉक्टरों की भारी कमी है, क्योंकि डॉक्टर अक्सर शहरी सुविधाओं के चलते इन इलाकों में जाना नहीं चाहते। इसी के मद्देनजर सरकार ने ठेके पर डॉक्टरों को नियुक्त करने का निर्णय लिया है। स्थितियों के अनुसार उन्हें दोगुने तक वेतन दिया जा सकता है। आजाद ने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में चिकित्सा क्षेत्र पर अधिक ध्यान देते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के विस्तार, राष्ट्रीय मानव संसाधन परिषद की स्थापना तथा सार्वजनिक क्षेत्र के टीके बनाने वाली इकाइयों को दोबारा चालू करने जैसे कई वादे किए थे। उन्हीं पर अमल करते हुए सरकार ने ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सभी सुविधाओं से लैस करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए अगले तीन माह में ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने का घोषणा की है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की नियुक्ति राज्य सरकारों द्वारा की जाएगी तथा केंद्र सरकार उन्हें हर संभव मदद देगी। |