ब्रिटेन ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश में कहा है कि मुंबई पर आतंकी हमले के संबंध में भारत द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों पर वह कार्रवाई करे, चाहे वह भारत के उस विचार से सहमत न हो कि इस घटना में पाक की कोई आधिकारिक एजेंसी शामिल है। ब्रिटेन के विदेशमंत्री डेविड मिलिबैंड ने मुम्बई हमले के बाद भारत की संयमित प्रतिक्रिया की सराहना की और पाकिस्तान से इसके जवाब में आपराधिक न्याय के एजेंडे पर अमल करने को कहा, जो दक्षिण एशिया के दोनों मुल्कों के हित में भी है। उन्होंने कहा कि पूरी पाकिस्तान सरकार की प्राथमिक एवं बुनियादी जिम्मेदारी है कि वह आतंकी संगठन लश्कर को चुनौती की तरह स्वीकार करे और इसकी जड़ों को निशाना बनाने के साथ यह सुनिश्चित करे कि गिरफ्तार लोगों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया जा सके। मिलिबैंड ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की तथा विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी तथा गृहमंत्री पी. चिदंबरम से बातचीत के बाद कहा कि ब्रिटेन इस घटना का पाकिस्तान के संबंध होने के आधार पर आगे बढ़ने को प्रतिबद्ध है।
बहरहाल मुखर्जी ने उम्मीद जताई कि पाकिस्तान भारतीय कानून के तहत भगोड़ों को भारत को सौंप देगा। पाकिस्तान इससे इनकार करता रहा है। उन्होंने दुनिया के देशों से पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाने को कहा, जिससे मुम्बई पर आतंकी हमला करने वालों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया जा सके।
सत्यम प्रकरण से घबराएँ नहीं : विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी सत्यम के हाल के घटनाक्रम से घबराने की जरूरत नहीं है तथा देश में आर्थिक वृद्धि दर ऊँची बनी रहेगी।
उन्होंने कहा सत्यम घटनाक्रम में आवश्यक सुधार किए गए हैं, घबराने की जरूरत नहीं है। देश में आर्थिक वृद्धि दर सात से साढ़े सात प्रतिशत बनी रहेगी और देश में निवेश और बचत की स्थिति संतोषजनक है।
मिलीबैंड ने कहा टोकरी में एक खराब सेब का मतलब यह नहीं है कि सभी फल खराब हैं। उन्होंने कहा भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है तथा यहाँ उद्यमशीलता का माहौल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सत्यम प्रकरण में भारत सरकार समुचित कार्रवाई करेगी। |