सालाना कैलाश मानसरोवर यात्रा कड़ी सुरक्षा के बीच इस साल के मध्य में शुरू होगी। इस यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु कैलाश पर्वत और तिब्बत स्थित मानसरोवर झील जाते हैं। इस वर्ष यह यात्रा अनुकूल मौसम होने पर मई के अंत या जून के शुरू में आरंभ होगी और 26 दिन में पूरी हो जाएगी।
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया हाल ही में सुरक्षा संबंधी घटनाओं को देखते हुए इस यात्रा के लिए कड़ी सुरक्षा की व्यवस्था की जाएगी। अकसर इस यात्रा का मार्ग मौसम से प्रभावित हो जाता है जिसे देखते हुए यात्रा की तारीख तय की जाएगी।
सरकार ने विदेश मंत्रालय के माध्यम से इस सिलसिले में 11 जनवरी को एक अधिसूचना जारी कर दी है। यह यात्रा अत्यंत दुर्गम मानी जाती है, क्योंकि इसमें प्रतिकूल परिस्थितियों में 19500 फीट की ऊँचाई पर चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक जत्थे के लिए संचार और चिकित्सा सुविधाएँ भी बढ़ाई जाएँगी ताकि यात्रा में कोई बाधा न आए। प्रत्येक जत्थे को सैटेलाइट फोन की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। पिछले साल 960 श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। प्रत्येक जत्थे में 60 श्रद्धालु थे।
अधिसूचना में कहा गया है वर्ष 2009 में 60-60 श्रद्धालुओं के 16 जत्थे भेजने की योजना है। पर्वतारोहण में दक्ष भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवान यात्रा के दौरान सैटेलाइट फोनों के जरिये संचार सुविधा मुहैया कराएँगे। साथ ही ऊँचाई पर वे चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा भी प्रदान करेंगे।
अधिकारी ने बताया कि इस ड्यूटी के अलावा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवान आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने का काम भी करेंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार यात्रियों को वीजा, संपूर्ण चिकित्सा परीक्षण और वित्तीय औपचारिकताएँ पूरी करने के लिए चार दिन तक दिल्ली में रहना होगा। विदेश मंत्रालय विभिन्न राज्यों और केंद्र सरकार की एजेंसियों के समन्वय से कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित करता है। यह यात्रा 1981 में भारत और चीन के बीच हुई एक द्विपक्षीय व्यवस्था के तहत 1981 से ही आयोजित की जा रही है। |