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ऊर्जावान भविष्य की तैयारी करें-प्रणब
पेट्रोटेक में तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर जोर
विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने तेल प्रतिष्ठानों और तेल जहाजों के आवागमन की सुरक्षा पर जोर देते हुए विश्व बिरादरी से इस मामले में आपसी समन्वय और सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया है।

आठवें अंतरराष्ट्रीय तेल एवं गैस सम्मेलन पेट्रोटेक-2009 का यहाँ उद्घाटन करते हुए मुखर्जी ने कहा कि तेल के निर्यातक देश हों या फिर आयातक देश उनके लिए ऊर्जा की सुरक्षित आपूर्ति और उसका सुरक्षित परिवहन जरूरी हो गया है। यहाँ तक कि तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा भी आज सभी की जरूरत बन गई है, इसलिए दुनिया के देशों को इसके लिए आपस में बेहतर तालमेल और सहयोग करना चाहिए।

ईरान, कनाडा, इंडोनेशिया, ओमान, मॉरीशस और यमन सहित दुनिया के कई प्रमुख तेल उत्पादक और उपभोक्ता देशों के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में दुनियाभर से आए 4000 से अधिक प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा मैं आपको लोगों के समक्ष अपनी यह सिफारिश रखता हूँ,आप लोग इस तरफ ध्यान दीजिए।

मुखर्जी ने हाल में मुंबई में हुए आतंकवादी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि यह सीधे भारत के आर्थिक विकास पर हमला था। उन्होंने कहा इस तरह के आतंकवादी हमले का खतरा सभी अर्थव्यवस्थाओं के समक्ष बना हुआ है। चाहे वह सीधे किसी देश से हो या फिर आतंकवादियों से हो।

उन्होंने कहा हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में इस तरह के हमले का जोखिम ज्यादा लगता है। तेल संपत्तियों की सुरक्षा सीधे-सीधे किसी एक देश के लिए केवल कानून एवं व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि यह तेल निर्यातक और आयातक सभी से जुड़ी है।

मुखर्जी ने कहा कि पूरी दुनिया इस समय वित्तीय और आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है। ऐसे में आर्थिक मंदी और सुधार की बातें आम हो गई हैं। हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में भी इसे महसूस किया जा रहा होगा, लेकिन सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें आर्थिक अनिश्चितता के वर्तमान दौर से आगे बढ़कर सोचना चाहिए।

उन्होंने कहा हमें ऊर्जावान भविष्य के लिए तैयारी करना चाहिए, जिसमें न मंदी के झटके हों और न ही कोई असंतुलन। विज्ञान भवन के खचाखच भरे विशाल हॉल में इस मौके पर मुखर्जी के साथ पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री मुरली देवड़ा, पेट्रोलियम राज्य मंत्री दिनशा पटेल तथा कई देशों के ऊर्जा मंत्री मौजूद थे।

उन्होंने कहा भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए 70 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल का आयात करना पड़ता है। देश के आर्थिक विकास में ऊर्जा की कमी सबसे अहम् चुनौती है। उन्होंने कहा ऊर्जा साधनों में तेल एवं गैस का 45 प्रतिशत तक हिस्सा है। आने वाले वर्षों में भी इस पर निर्भरता बने रहने की उम्मीद है।

मुखर्जी ने कहा ऊर्जा साधनों की तंगी के बावजूद उनकी सरकार ने आर्थिक विकास की गति को बनाए रखने की ठानी है, क्योंकि आर्थिक वृद्धि की उच्च रफ्तार के बल पर ही गरीबी और मानव संसाधन के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा वैश्विक आर्थिक मंदी के बावजूद देश की आर्थिक विकास दर इस साल 7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। बुनियादी आर्थिक कारक मजबूत हैं, घरेलू बचत, निवेश, उत्पादकता और घरेलू माँग सभी उच्च स्तर पर बने हुए हैं। इसे देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि भारत विदेशी मंदी के झटकों से उबर जाएगा और आर्थिक विकास की गति बनी रहेगी।

मुखर्जी ने कहा उनकी सरकार निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी, प्रतिस्पर्धा और बाजारोन्मुखी हाइड्रोकार्बन क्षेत्र के पक्ष में है। उनकी सरकार इस क्षेत्र में बढ़ते विदेशी निवेश के भी पक्ष में है।

विदेश मंत्री ने पिछले महीनों कच्चे तेल के मूल्यों में आई भारी उठापटक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा मात्र छह महीने के भीतर कच्चे तेल के दाम में भारी उठापटक हुई। इससे बाजार के अल्पकालिक असंतुलन, दुनिया में तेल की कम होती अतिरिक्त क्षमता और तेल एवं गैस क्षेत्र की संवेदनशीलता का पता चलता है।

मुखर्जी ने कहा वे ज्योतिषी तो नहीं हैं, जो यह बता सकें कि तेल के दाम कहाँ पहुँचेंगे, लेकिन इतना वह जरूर कह सकते हैं कि कच्चे तेल के दाम में होने वाली भारी उठापटक से आने वाले समय में न तो तेल के उत्पादकों और न ही विक्रेताओं का कोई भला होने वाला है।

उन्होंने कहा इन तमाम मुद्दों पर विचार करने का समय है। पेट्रोटेक-2009 का मूल विषय भी इसी से जुड़ा हुआ है। दुनिया के सहयोग से ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, चुनौतियाँ और निदान। उन्होंने कहा व्यापक परिप्रेक्ष्य में यदि देखा जाए तो पूरी दुनिया के देशों के ऊर्जा हित आपस में जुड़े हुए हैं।

हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में बढ़ती माँग और उसे पूरा करने अपने आप में दुनिया के देशों के आपसी तालमेल पर ही निर्भर है। इसके लिए तेल की आपूर्ति, इस क्षेत्र में निवेश और प्रौद्योगिकी उन्नयन ही सही रास्ता हो सकता है। इस दिशा में सभी को काम करना चाहिए।
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