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चक्का जाम से नींद हराम
-वेबदुनिया डेस्क
पिछले पाँच दिनों सारे देश में ट्रक ऑपरेटरों की हड़ताल चल रही है। ट्रक ऑपरेटरों की माँग डीजल की कीमतों में कमी किए जाने की है और उनका कहना है कि डीजल की कीमतों में प्रति लीटर दस रुपए की कमी की जाना चाहिए क्योंकि इसके बिना उनके व्यावसायिक हित प्रभावित हो रहे हैं।

सरकार द्वारा हड़ताल खत्म करने की अपीलों के बावजूद ट्रक ऑपरेटर भी अपनी माँगों पर अड़े हुए हैं। ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि डीजल की दरों में 10 रुपए की कमी के साथ साथ टोल टैक्स खत्म हो और सर्विस टैक्स के बारे में हुए समझौते को अमल में लाया जाए। उन्होंने केंद्र सरकार को चुनौती दी है कि वह पेट्रॉल और डीजल की दरों के मामले में श्वेत पत्र लाए।

ट्रक ऑपरेटर्स अगली रणनीति तय करने के लिए शुक्रवार को ढाई बजे आपात बैठक करने वाले थे लेकिन सरकार ने ऑल इंडिया मोटर्स ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी)के अध्यक्ष चरण सिंह लोहारा को गिरफ्तार कर लिया है।

लोहारा डीजल की कीमतों में कमी की माँग को जायज ठहराते हैं। उनका तो यहाँ तक कहना है कि तेल कंपनियाँ भी सत्यम की तरह अपने बहीखातों में हेरफेर कर रही हैं। इन कंपनियों के घाटे झूठे हैं। सरकार इसकी जाँच करवाए और इस बारे में श्वेत पत्र जारी करे।

एआईएमटीसी के अध्यक्ष चरणसिंह लोहारा ने बताया कि चक्का जाम के चौथे दिन देश भर में स्थिति बद से बदतर हुई लेकिन केन्द्रीय परिवहन मंत्री ने उन्हें मिलने के लिए नहीं बुलाया। जब उनसे पूछा गया कि आम जनता की दुर्दशा को देखते हुए हड़ताल वापस लेंगे तो उनका कहना था ऐसा नहीं होगा।

उन्होंने बताया कि यदि सरकार उनकी माँग नहीं मानती तो राष्ट्रीय राजधानी में 1200 परमिट सरकार को लौटा दिए जाएँगे। दावा किया जा रहा है कि अभी तक 700 परमिट जमा करा दिए गए हैं और अन्य राज्यों में भी ऐसा ही करने की धमकी दी जा रही है।

हालाँकि इस बीच समाचार है कि मुम्बई, नवी मुम्बई, तमिलनाडु-कर्नाटक सीमा, लुधियाना-खन्ना और कानपुर में हड़ताल समर्थक ट्रांसपोर्टरों ने ट्रक चला रहे ड्राइवरों के साथ मारपीट की है। हड़ताल का अधिकतर औद्योगिक उत्पादों की ढुलाई पर असर नहीं पड़ा है लेकिन अगर और ट्रांसपोर्टर्स भी एआईएमटीसी के समर्थन में आते हैं तो ढुलाई प्रभावित हो सकती है।

ट्रक मालिकों के संगठन ऑल इंडिया कन्फेडरशन ऑफ गुड्स व्हीकल ऑनर्स एसोसिएशन ने भी ट्रक ड्राइवरों के साथ बल प्रयोग की पुष्टि की। रेलगाड़ियों से जिन कंटेनरों का परिवहन होता है उसे भी डिपो से ग्राहक तक पहुँचाने और ग्राहकों से डिपो लाने के काम में लगे ट्रक चल रहे हैं। पर इनका परिवहन बाधित करने की कोशिश की जा रही है।

ट्रक हड़ताल के असर को देखते हुए दिल्ली,राजस्थान, गुजरात, आंध्रप्रदेश और उत्तर प्रदेश में एस्मा लगा दिया गया है और जल्दी ही तमिलनाडु में भी यह प्रभावी किया जा सकता है।

हड़ताल के बारे में जब सरकारी अधिकारियों से पूछा जाता है कि एएमआईटीसी को क्यों नहीं मिलने के लिए बुलाया गया तो उनका कहना था कि संगठन के पदाधिकारियों से तो रोज बैठक हो रही है। वे हर बार एक नई माँग लेकर आ रहे हैं। इसलिए उनकी माँग को मानने में समस्या आ रही है।

हालाँकि इस बीच एआईएमटीसी के पदाधिकारी हड़ताल के लिए राजनीतिक समर्थन भी जुटा रहे हैं। मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने केन्द्र सरकार से ट्रक ऑपरेटरों से बातचीत करने की माँग की है। संगठन के लोग भाजपा के नेताओं से भी मिले हैं।

देशभर के ट्रक ऑपरेटरों और ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल में अब गुजरात से मुंबई आने वाली निजी बसें भी शामिल हो गई हैं। गुजराती प्रवासी वाहन संचालक मंडल ने इसकी घोषणा की है। इसके बाद गुजरात से मुंबई जाने वाली सभी ट्रेनें खचाखच भरी रहीं।

पाँच दिन से चल रही हड़ताल के कारण कई राज्यों में फलों,सब्जियों की आवक में कमी देखी गई है। रोजमर्रा की विभिन्न बस्तुओं के दाम बढ़ने लगे हैं, जबकि कुछ राज्यों में पेट्रोल,डीजल,एलपीजी और दूध आपूर्ति में लगे ट्रक व टैंकरों को हड़ताल से बाहर रखने का आग्रह किया गया जिसे मानते हुए रविवार तक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को बाधित नहीं करने का निर्णय किया है।
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