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तेल कंपनियों की हड़ताल खत्म होने से राहत
-वेबदुनिया डेस्क
शुक्रवार की रात सरकारी तेल कंपनियों के अफसरों की हड़ताल खत्म होने का सरकार ने दावा किया है। सरकार का कहना है कि सभी तेल कंपनियों की हड़ताल समाप्त हो गई है लेकिन सरकारी दावे की पुष्टि नहीं की जा सकी। फिर भी इस खबर से लोगों ने राहत की साँस ली है।

इससे पहले शुक्रवार की रात तक बुधवार से शुरू हुई सरकारी तेल अधिकारियों की हड़ताल से देश के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल के लिए मारामारी मची रही और उम्मीद की जा रही है कि अगले दो दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी।

पेट्रोल, डीजल के संकट के बीच एलपीजी सिलेंडर आपूर्ति की स्थिति भी लड़खड़ाने लगी थी। दिल्ली में शुक्रवार की शाम तक सभी पेट्रोल पंपों के ड्राई होने की आशंका बनी रही। देश के पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्रों से रसोई गैस की किल्लत की सूचनाएँ भी आ रही थीं, जबकि दूसरी ओर सरकार हड़ताली तेल अफसरों के आगे झुकने के बजाय उनसे सख्ती से निपटने के मूड में बनी रही।

पेट्रोलियम सचिव आरएस पांडे का कहना था कि ओएनजीसी में 64 हड़ताली अधिकारियों की बर्खास्तगी का आदेश दिया गया है। ऐसी ही कार्रवाई आईओसी और गेल जैसी कंपनियों के अधिकारियों के साथ भी दोहराई जाएगी।

हालाँ‍कि हालात यह थे कि आईओसी की चार रिफाइनरियों को आंशिक रूप से बंद कर दिया गया था और ओएनजीसी के हजीरा प्लांट में भी हड़ताल शुरू हो गई थी।

हड़ताल से डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति बुरी तरह लड़खड़ा गई थी। तेल और रसोई गैस की आपूर्ति बरकरार रखने के लिए दिल्ली और असम के बाद गुरुवार को गुजरात, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र में अनिवार्य वस्तु रखरखाव कानून (एस्मा) लागू कर दिया गया था।

अंतत: नतीजा बातचीत से ही निकला : इस बीच हड़ताल पर गए सरकारी तेल कंपनियों के अधिकारियों और सरकार के बीच वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई थी लेकिन शुक्रवार की रात को पेट्रोलियम मंत्री ने हड़ताल वापस लिए जाने की घोषणा कर दी।

इससे पहले शुक्रवार सुबह भी हड़ताली अधिकारियों और सरकार के बीच बातचीत विफल हो गई थी जिसके बाद केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात भी की थी। इस मुलाकात के बाद उन्होंने कहा था कि इस हड़ताल से आम जनता को कठिनाई हो रही है। मेरी अपील है कि वे हड़ताल वापस ले लें।

हड़ताल से स्थिति गंभीर बनी : हालाँकि इससे पहले अलग-अलग राज्यों से मिल रही खबरों के मुताबिक अधिकतर पेट्रोल पंपों में स्टॉक खत्म हो चुका था और हवाई यातायात भी बाधित हो रहा था। देश के कई हवाई अड्डों पर ईंधन के संकट के कारण भी उड़ानों में विलंब होने के समाचार थे।

कार्रवाई की शुरुआत : हालाँ‍कि टीवी पर दी जा रही जानकारी के मुताबिक करीब 10 हजार कर्मचारी काम पर वापस आ गए थे लेकिन समाचार एजेंसियों के अनुसार इस बीच तेल कंपनियों ने हड़ताल का नेतृत्व कर रहे अधिकारियों के ख‍िलाफ निलंबन, बर्खास्तगी की कार्रवाई भी शुरू कर दी थी।

सरकार के निर्देश पर ओएनजीसी ने 70 से अधिक अधिकारियों की एक सूची तैयार कर ली थी जिन्हें हड़ताल करवाने के आरोप में निलंबित या बर्खास्त किया जाना था। हड़ताल जारी रहने की स्थिति में कई और अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती थी।

पर शुक्रवार दोपहर बाद समाचार मिला कि बीपीसीएल के कर्मचारियों ने हड़ताल वापस ले ली है। हड़ताल से बेहाल लोगों के लिए यह राहत की खबर थी। बीपीसीएल के कर्मचारी काम पर लौट चुके हैं और शुक्रवार शाम से बीपीसीएल के पेट्रॉल पंपों पर तेल मिलने लगेगा, यह लोगों के लिए राहत की बात थी लेकिन शुक्रवार की देर रात सभी सरकारी तेल कंपनियों के अधिकारियों की हड़ताल खत्म होने का समाचार आ गया।

दिल्ली, मुंबई सर्वाधिक प्रभावित रहे : हड़ताल से बेहाल दिल्ली सरकार ने केंद्र से तेल कंपनियों के हड़ताली अफसरों पर राष्ट्रीसुरक्षा कानून लगाने की माँग की थी। दिल्ली के मुख्य सचिव राकेश मेहता ने कहा कि दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार से माँग की थी कि शाम तक दिल्ली में और 100 पेट्रॉल पंपों पर तेल मुहैया कराया जाए लेकिन बाद में स्थिति में सुधार हो गया।

अधिकारियों की माँग : तेल कंपनियों के अधिकारियों का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें जब महँगी थीं तो उनके वेतन-भत्तों में कटौती की गई थी। अब जब हालात सामान्य हैं तो बाकी पीएसयू की तरह इनके वेतन में भी इजाफा होना चाहिए।

इनका कहना था कि सरकार अगर पहले ही इनकी माँगों पर विचार करती तो हड़ताल की नौबत ही नहीं आती। ये अधिकारी केंद्रीय कर्मचारियों की तरह आधा महँगाई भत्ता बेसिक वेतन के साथ मर्ज करने की माँग कर रहे थे जो कि 1 जनवरी 2005 से लागू हो।

ऑइल सेक्टर ऑफिसर्स एसोसिएशन (ओएसओए) के अध्यक्ष अमित कुमार का दावा था कि 17 नवंबर को भारी उद्योग मंत्री संतोष मोहन देव ने हमारी माँगों को मान लिया था और हर 5 साल पर वेतन बढ़ोतरी की समीक्षा पर राजी हो गए थे, लेकिन बाद में वे अपनी बात से पलट गए। इसका नतीजा यह हो सकता था कि हमें अगले 10 साल तक इसी वेतन पर काम करना पड़ता और इसका विरोध करने के लिए हड़ताल पर जाने का फैसला किया गया।

पेट्रोलियम मंत्रालय का रुख : पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना था कि पीएसयू अधिकारियों की सैलरी एंट्री लेवल पर 1 लाख रुपए मासिक से ज्यादा है। तेल पीएसयू के चेयरमैन की सैलरी करीब 3 लाख रुपए महीने है। तेल मंत्रालय के अनुसार कि पीएसयू अधिकारियों को वेतन-भत्तों में औसतन 40 फीसदी की वृद्धि दी गई लेकिन इन अधिकारियों की माँग 100 फीसदी वृद्धि की है जो कि संभव नहीं है।

पंप मालिकों का बयान : तेल और गैस कंपनियों के कर्मचारियों की बुधवार सुबह से शुरू हुई देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल के दूसरे दिन ही दिल्ली के करीब 65 फीसदी पेट्रॉल पंप ड्राई हो गए। पेट्रॉल पंप मालिकों का कहना था कि इसके लिए सरकार की गलत नीति ही जिम्मेदार रही वरना एक दिन और पंपों से वाहनों में तेल भरा जा सकता था।

उनके मुताबिक दिसंबर में पेट्रॉल की कीमतों में प्रति लीटर 5 रुपए और डीजल में 2 रुपए की कमी की गई। इससे अधिकतर पेट्रोल पंप मालिकों को काफी घाटा सहना पड़ा था। मौजूदा समय में पेट्रॉलियम मंत्री मुरली देवड़ा के तेल की कीमतों में और कटौती करने जैसे बयान ने पंप मालिकों में हड़कंप मचा रखा है।

उनका कहना है कि इन बातों को देखते हुए कोई भी पंप मालिक तेल का स्टॉक नहीं कर रहा है। इसलिए यह समस्या हुई और हड़ताल के दूसरे दिन ही इतनी बड़ी संख्या में पंपों पर तेल खत्म हो गया। आमतौर पर पेट्रॉल पंपों पर दो से तीन दिनों का स्टॉक होता है।

लेकिन कोई भी पंप मालिक एडवांस में तेल इसलिए ही नहीं ले रहा था क्योंकि उसे पता है कि कभी भी तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है। ऐसे में जबरदस्ती में घाटा वहन करना समझदारी नहीं है।
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