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नदी जल विवाद की सुनवाई दो मार्च से
उच्चतम न्यायालय के पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ पंजाब और हरियाणा के बीच नदी जल बँटवारे विवाद खासकर पंजाब विधानसभा द्वारा इस संबंध में दोनों राज्यों के बीच के सभी समझौते को निरस्त किए जाने की संवैधानिक वैधता पर दो मार्च से सुनवाई करेगी।

मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन तथा न्यायमूर्ति सदाशिवम की खंडपीठ ने इस सुनवाई के लिए दो मार्च की तिथि तय की है।

पंजाब विधानसभा ने नदी जल बँटवारों को लेकर हरियाणा के साथ हुए समझौते को रद्द करते हुए पंजाब समझौते निरस्तीकरण अधिनियम 2004 पारित किया था।

दरअसल पंजाब पर सतलुज-यमुना लिंक नहर परियोजना पूरी करने में कोई दिलचस्पी नहीं लेने का आरोप लग रहा है, जबकि हरियाणा इस नहर को यथाशीघ्र पूरा करने के लिए दबाव डाल रहा है।

पूर्व उपप्रधानमंत्री स्वर्गीय देवीलाल के बेटे प्रतापसिंह चौटाला ने भी पंजाब सरकार तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह पर अदालत की अवमानना का मामला दर्ज करा रखा है। पीसी जैन ने भी पंजाब समझौते निरस्तीकरण अधिनियम 2004 की वैधता को चुनौती दी है। इस मामले से सभी याचिकाओं पर अब एक ही साथ दो मार्च से सुनवाई होगी।
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