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इच्छा मृत्यु को मान्यता की सिफारिश
भारतीय दंड संहिता में संशोधन का प्रस्ताव
केरल विधि सुधार आयोग ने भारतीय दंड संहिता (भादंसं) में सुधार की सिफारिश की है, ताकि तकलीफ रहित मृत्यु को कानूनी स्वीकृति मिल सके और आत्महत्या के प्रयास को गैरदंडनीय अपराध माना जाए।

मृत्युशैया पर पड़े रोगियों को तकलीफ रहित मृत्यु की सिफारिश करते हुए उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश वीआर कृष्णन अय्यर के नेतृत्व वाले आयोग ने कहा नैतिकता जीवन की अपरिहार्यता है, लेकिन मृत्यु भीषण रोगों और असहनीय कष्टों से मुक्ति है। जीवन पवित्र है, लेकिन बिना राहत वाला भीषण दर्द एक यातना है, जो अस्तित्व के मायने के खिलाफ है।

आयोग के उपाध्यक्ष न्यायमूर्ति टीवी रामकृष्णन ने बताया कई बुद्धिमान लोगों ने तकलीफ रहित मृत्यु को चुना है। भारतीय दंड संहिता और इसे बनाने वाले लार्ड मैकाले कानून सुधारकों में कोई अंतिम नाम नहीं हैं। आयोग ने प्रस्तावित विधेयक तैयार किया है, जिस पर उम्मीद है कि गंभीरता से विचार किया जाएगा, क्योंकि कई आधुनिक देशों ने तकलीफ रहित मृत्यु के सिद्धांत को कानूनी रूप से स्वीकार कर लिया है।

आयोग ने सिफारिश की है कि मृत्युशैया पर गए व्यक्ति को उसके नजदीकी परिजनों एवं चिकित्सकों की राय और निगरानी में जीवन समाप्त करने की इजाजत दी जा सकती है। प्रस्तावित विधेयक में इस संबंध में कड़ी शर्तों और बचाव के प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा यह प्रस्तावित विधेयक केरल और भारत में शायद अपने तरह का पहला विधेयक होगा।
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