जम्मू-कश्मीर में पुंछ के घने जंगलों में आतंकवादियों के साथ चल रही मुठभेड़ लगातार सातवें दिन भी जारी है और सुरक्षा बलों को होने वाले संभावित नुकसान को टालने के मद्देनजर सैन्यकर्मी छिपे हुए आतंकवादियों को थका देने के लिए एक सोचे-समझे अभियान के तहत कार्रवाई कर रहे हैं। सेना ने कहा कि जम्मू क्षेत्र के भाटी धार जंगलों में 8 से 10 आतंकवादी छिपे हुए हैं और संदेह है कि ये पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हैं।
रक्षामंत्री एके एंटनी, थलसेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर और जम्मू के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुठभेड़ जल्द खत्म करने के लिए एक रणनीति बनाई है। इस मुठभेड़ में भारी गोलीबारी हो रही है पर यह बात स्वीकार की गई है कि सुरक्षाबलों में जान का नुकसान टालने के लिए इसमें समय लग रहा है।
एंटनी ने नई दिल्ली में कहा कि हम आतंकवादियों का सफाया कर देना चाहते हैं, लेकिन हम यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कोई नुकसान नहीं हो।
थलसेना प्रमुख जनरल कपूर ने कहा कि हम कि आतंकवादियों को ज्यादा से ज्यादा कमजोर कर देना चाहते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हमारी तरफ कोई शहादत नहीं हों। यह क्षेत्र चट्टानों वाला है और इसमें गुफाएँ हैं। यही कारण है कि इसमें समय लग रहा है।
किलेबंदी कर गुफाओं में छिपे आतंकवादियों का सफाया करने में कितना समय लगेगा, इस पर जनरल कपूर ने कहा कि सेना जितना जल्द हो सके अभियान खत्म करने की कोशिश कर रही है।
ब्रिगेडियर गुरदीपसिंह ने मेंढर में कहा कि यह कहना संभव नहीं है कि सेना का अभियान खत्म होने में कितना समय लगेगा। क्षेत्र में घना जंगल तथा मौसम आतंकवादियों को खदेड़ने में बाधा उत्पन्न कर रहा है।
सिंह ने कहा कि हम आतंकवादियों को थका देने के लिए सोचे-समझे अभियान को अंजाम दे रहे हैं ताकि हमें नुकसान न हो। यही कारण है कि हम वहाँ छिपे आतंकवादियों को बाहर निकालने में समय ले रहे हैं।
यह पूछने पर कि छिपे हुए आतंकवादियों का क्या मकसद हो सकता है और क्या उनका पाकिस्तान से कोई संबंध है, जनरल कपूर ने कहा कि उनका उद्देश्य काफी स्पष्ट है। बीते कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर के भीतर उग्रवाद जारी है। लिहाजा वे उसी उग्रवाद का हिस्सा हैं, लेकिन इस सभी को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी भारतीय सेना की हैं। |