विश्व समुदाय की गोलबंदी की अपनी मुहिम के तहत भारत ने मुंबई पर आतंकवादी हमलों में पाकिस्तान आधारित तत्वों की संलिप्तता उजागर करने वाली सूचनाओं को सोमवार को कई देशों को सौंपा और अनेक देशों ने इसे मजबूत और यकीन करने लायक माना।
विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने यहाँ अमेरिका, इसराइल, ब्रिटेन फ्रांस, जापान, जर्मनी, तुर्की और कनाडा समेत एक दर्जन से ज्यादा देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों के लिए एक विशेष ब्रीफिंग का आयोजन किया और उन्हें मुंबई हमलों की जाँच के ब्योरों से अवगत कराया।
मेनन ने राजनयिकों को यह जानकारी दी कि ढेर सारे हथियारों से लैस 10 पाकिस्तानी आतंकवादी कराची से कैसे आए और पिछले साल 26 नवंबर को कैसे उन्होंने मुंबई पर हमले किए और सुरक्षा बलों के साथ तीन दिन तक चले संघर्ष में कैसे आतंकवादी हमलावर पाकिस्तान में अपने आकाओं के साथ संपर्क में थे।
साक्ष्यों में मुंबई हमलों के दौरान जिंदा गिरफ्तार किए जा सके एकमात्र आतंकवादी हमलावर अजमल आमिर कसाब का बयान शामिल है।
कसाब ने अपने इकबालिया बयान में बताया कि कैसे वह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में फरीदकोट के एक आम नौजवान से लश्कर-ए-तैयबा का प्रेरित आतंकवादी में तब्दील हो गया।
कसाब ने भारतीय जाँचकर्ताओं को यह भी बताया कि आतंकवादी अभियान के लिए कैसे उसे विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया गया। ब्रीफिंग के बाद ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त जान मैककार्थी ने टिप्पणी की भारत ने बहुत ही मजबूत मामला पेश किया है। हम इसका अध्ययन करेंगे।
एक अन्य देश के राजनयिक ने अपना नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर कहा कि विदेश सचिव की ओर से पेश साक्ष्य से वे खुश और प्रभावित हैं। |