मुंबई आतंकी हमलों के बाद सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर घोर निराशा जताते हुए चर्चित लेखिका शोभा डे ने कहा कि हमें अपने शत्रुओं पर शेर की तरह दहाड़ना चाहिए, लेकिन अभी तक हम सिर्फ बिल्ली की तरह म्याऊँ-म्याऊँ कर रहे हैं।
आतंकवाद के खिलाफ सरकार द्वारा उठाए कदमों के बारे में प्रतिक्रिया पूछे जाने पर शोभा ने कहा कि मैं बिलकुल संतुष्ट नहीं हूँ। अभी तक केवल बातचीत चल रही है, निरर्थक बातचीत। सरकार ने आतंकवाद से निपटने के लिए कोई ऐसा ठोस कदम नहीं उठाया है, जिससे उसकी गंभीरता का पता चल सके।
आतंकवाद से मुकाबले में सरकार की स्थिति को बेहद कमजोर करार देते हुए उन्होंने कहा कि हमारी प्रतिक्रिया बेहद नरम रही है। अपने शतुओं पर दहाड़ने के बजाय हम केवल बिल्ली की तरह म्याऊँ- म्याऊँ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक केन्द्रीय नोडल एजेंसी की निगरानी एवं नियंत्रण में आतंकवाद का मुकाबला सभी एजेंसियों को कड़ाई के साथ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई में अन्य देशों के साथ मिलकर काम करना चाहिए और सूचनाओं एवं खुफिया खबरों का आदान-प्रदान करना चाहिए।
मुंबई आतंकी हमलों में पकड़े गए एकमात्र आतंकवादी अजमल आमीर ईमान उर्फ कसाब की ओर इशारा करते हुए शोभा डे ने कहा कि पकड़े गए आतंकवादियों के प्रति कोई नरमी नहीं दिखाई जानी चाहिए और उनका दोष साबित करना चाहिए।
मुंबई हमलों के समय उत्पन्न स्थिति की ओर ध्यान दिलाते हुए उन्होंने कहा कि उस समय पूरी तरह से भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी और नेतृत्व का अभाव था। उन 60 घंटों के दौरान मुंबई पर कोई नियंत्रण नहीं था। वर्ष 2008 में हुए कई सिलसिलेवार हमलों के बाद प्रत्येक भारतीय में जागरूकता लाए जाने की जरूरत पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय की मृत्यु पर ध्यान देने और शोक व्यक्त करने की जरूरत है।
गौरतलब है कि पिछले साल 26 नवंबर को हुए मुंबई हमलों के बाद आतंकवाद के मामले में खुफिया एजेंसियों सहित सरकार की विफलता की जिन प्रमुख लोगों ने मुखर आलोचना की थी उनमें शोभा डे शामिल हैं। |