-भाषा सिंह भारत-पाक युद्ध रुकवाने में अमेरिका की सक्रिय भूमिका का एक बड़ा कारण भारत को यथाशीघ्र करीब 6 हजार अरब रुपए के परमाणु रिएक्टर बेचने की तैयारी भी है। भारत सरकार के नए परमाणु ऊर्जा अभियान के अंतर्गत 21 परमाणु रिएक्टर लगने हैं। एक की कीमत करीब 300 अरब रुपए बताई जा रही है।
भारत और पाक के बीच युद्ध होने की स्थिति में निश्चित रूप से इस संभावित खरीद को धक्का लगेगा, क्योंकि तब सारा धन युद्ध क्षेत्र में झोंक दिया जाएगा और लंबे समय तक अर्थव्यवस्था उसके बोझ तले रहेगी। भीषण आर्थिक मंदी झेल रहे अमेरिका के लिए इतना बड़ा सौदा बहुत महत्वपूर्ण है।
इसके लिए अमेरिका की परमाणु कंपनियों ने अपना पूरा जोर लगा दिया है। अगले दो सालों में भारत 6 से लेकर 12 परमाणु रिएक्टर खरीदने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। कुछ का तो ब्लू प्रिंट भी तैयार हो गया है। इसको लेकर परमाणु रिएक्टर बनाने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ विशेषकर अमेरिका की जीई, वेस्टिंग हाउसिंग आदि बहुत उत्साहित हैं।
एक तरफ जहाँ अमेरिका की निजी कंपनियाँ भारत में अपने रिएक्टर बेचने से पहले यहाँ के कानून बदलवाने के लिए दबाव बना रही हैं, वहीं यह भी सुनिश्चित करना चाहती हैं कि रिएक्टरों की खरीद-फरोख्त में कोई बाधा न पड़े।
यह अलग बात है कि भारत के लिए मंदी के इस दौर में करीब 6 हजार अरब रुपए की राशि खर्च करना मुश्किल ही नजर आता है। हालाँकि परमाणु विशेषज्ञों का कहना है कि रिएक्टरों की कीमत कम कराने के लिए भी भारत इतने अधिक रिएक्टर खरीदने की बात कर सकता है।
इस बारे में भारत के शीर्ष परमाणु विशेषज्ञ प्रोफेसर एमवी रमना ने बताया कि 21 परमाणु रिएक्टर खरीदने की बात कहकर दरअसल भारत परमाणु रिएक्टर बनाने वाली कंपनियों से मोल-भाव करना चाहता है।
ऐसा भारत ही नहीं तमाम दूसरे देश भी करते रहे हैं। हालाँकि इस आधार पर कंपनियों ने दाम कम किए हों, इसकी कोई जानकारी नहीं है।
सामान्य तौर पर कंपनियों की कीमतें फिक्स होती हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर 12 रिएक्टर खरीदना भारत की अर्थव्यव्सथा पर भारी पड़ेगा और इसकी कोई जरूरत नहीं है। (नईदुनिया) |