- विनोद अग्निहोत्री
मुंबई हमलों की गुत्थी सुलझाने में जुटी खुफिया एजेंसियों ने हथियार, विस्फोटक समेत आतंकियों को मुंबई पहुँचाने में जिस संदिग्ध मददगार पर फंदा कसा है, उसे तीन साल पहले राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने पकड़ा था, लेकिन एक केंद्रीय मंत्री के दबाव में उसे छोड़ दिया गया।
मंत्री को इस व्यक्ति से अपने चुनाव में पूरी मदद मिलती है, बदले में मंत्री उसे संरक्षण देते हैं। खुफिया एजेंसियों और पुलिस को संदेह है कि इसी व्यक्ति के नेटवर्क का इस्तेमाल आतंकवादियों ने अपने हथियारों और विस्फोटकों के जखीरे के साथ मुंबई पहुँचने में किया।
सूत्रों के मुताबिक यह व्यक्ति इन दिनों देश से बाहर है, इसलिए इसके बेटे को पूछताछ के लिए उठाया गया है। करीब छह महीने पहले यह शख्स दाऊद इब्राहिम के बुलावे पर कराची भी गया था।
मुंबई हमले की जाँच में पुलिस के साथ राज्य और केंद्र की खुफिया एजेंसियाँ भी जुटी हैं। केंद्रीय खुफिया सूत्रों के मुताबिक मुंबई से लेकर पोरबंदर तक अरब सागर में मछली मारने वाले ट्रॉलरों के साथ मछली की ढुलाई करने वाली करीब 25 हजार नौकाएँ चलती हैं। इन्हें बार्ज कहा जाता है। इनमें करीब आठ हजार बार्ज नौकाएँ पंजीकृत नहीं हैं और इन्हें गैरकानूनी तरीके से चलाया जाता है।
ये सारी नौकाएँ मुंबई निवासी इस व्यक्ति और उसके दो अन्य साथियों के कारटेल की हैं, जिन पर खुफिया एजेंसियाँ अपना फंदा कस रही हैं। इसके अलावा पंजीकृत बार्ज नौकाओं में भी कई हजार नौकाएँ सामान्य मछुआरों के नाम से इसी शख्स ने पंजीकृत करा रखी हैं। इस तरह इस अकेले शख्स के पास करीब दस हजार बार्ज नौकाएँ हैं। इस कारटेल में गुजरात का भी एक व्यक्ति शामिल है। इनके नाम से नौसेना, तटरक्षक बल, कस्टम और स्थानीय पुलिस अच्छी तरह वाकिफ है।
खुफिया सूत्रों के मुताबिक आतंकियों को लाने वाले ट्रॉलर कुबेर के मालिक विनोद मसानी के पास भी करीब 25 ट्रॉलर हैं। दिलचस्प यह कि पाँच-छह महीने में मसानी का कोई ट्रॉलर पाकिस्तान में पकड़ लिया जाता है और कुछ दिन बाद उसे छोड़ दिया जाता है। खुफिया एजेंसियाँ इसकी जाँच भी कर रही हैं कि करीब पाँच साल पहले बेहद साधारण स्थिति वाले मसानी ने इतनी जल्दी इतने ट्रॉलर कैसे खरीद लिए?
सूत्र बताते हैं कि मछली मारने की आड़ में खाड़ी से डीजल की तस्करी का धंधा भी खूब हो रहा है। गहरे समुद्र में जहाजों में तस्करी करके लाए जाने वाले कच्चे डीजल को मछली पकड़ने वाले ट्रॉलरों में निकाला जाता है। फिर इसे बार्ज नौकाओं में लाद कर गुजरात और मुंबई के प्राकृतिक बंदरगाहों, जो सुनसान और उजाड़ रहते हैं, तक पहुँचाकर वहाँ से तेल टैंकरों में भरकर पेट्रोल पंपों को बेच दिया जाता है। यह कच्चा डीजल जिसमें परिशोधित डीजल से चार गुना ज्यादा सल्फर होता है।
आमतौर पर छह-सात रुपए प्रति लीटर की दर से खरीदा जाता है और इसे 20 रुपए प्रति लीटर की दर से बेच दिया जाता है। डीजल तस्करी का यह धंधा अरबों रुपए का है, जिसमें करीब पाँच से छह करोड़ रुपए प्रतिदिन सुरक्षा में तैनात सरकारी तंत्र को चढ़ावे के रूप में बँटता है, इसलिए ये नौकाएँ बेरोकटोक समुद्र में घूमती हैं और पोरबंदर से लेकर मुंबई तक कोई नहीं रोकता।
माना जा रहा है कि इन नौकाओं से ही मुंबई हमले के लिए आतंकवादियों, उनके हथियारों और विस्फोटकों को गुजरात के समुद्री रास्ते से मुंबई भेजा गया। गृह मंत्रालय के सूत्र भी बताते हैं कि पाक सीमा में जाने वाले भारतीय मछुआरों से जब्त की गई नौकाओं के जरिए भी आतंकी भारत भेजे जा रहे हैं। इस काम में दाऊद का नेटवर्क इस्तेमाल होता है। (नईदुनिया) |