अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें चार साल के न्यूनतम पर आने के बाद अब केंद्र सरकार भी पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कटौती का मन बना रही है। ज्यादातर प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनाव पूरे होने को हैं।
ऐसे में संकेत हैं कि सरकार अगले सप्ताह पेट्रोल की कीमतों में 10 रुपए प्रति लीटर, डीजल में तीन रुपए प्रति लीटर और एलपीजी में 20 रुपए प्रति सिलेंडर की कटौती कर सकती है।
सूत्रों का कहना है कि 11 दिसंबर को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में ईंधन की कीमतों में कमी करने के बारे में फैसला लिया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि तीन साल में पहली बार सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियाँ इंडियन ऑइल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम पेट्रोल पर प्रति लीटर 14.89 रुपए और डीजल पर 3.03 रुपए मुनाफा कमा रही हैं।
हालाँकि, केरोसिन की प्रति लीटर की बिक्री पर इन कंपनियों को 17.26 रुपए और एलपीजी पर 148.32 रुपए प्रति सिलेंडर का घाटा हो रहा है।
सूत्रों का कहना है कि सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में की गई बढ़ोतरी को वापस लेने का मन बना लिया है। पेट्रोल पर हो रहे मुनाफे के कुछ हिस्से का इस्तेमाल एलपीजी के दामों को कम करने के लिए किया जा सकता है।
सूत्रों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव 24 दिसंबर को खत्म हो रहा है। जब चुनाव आयोग मानता है कि दिल्ली, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम के नतीजों का ऐलान जम्मू-कश्मीर में चुनाव पूरा होने से पहले किया जा सकता है तो सरकार भी पहले ही पेट्रोल, डीजल की कीमतों में कटौती कर सकती है।
तेल कंपनियों को पहली नवंबर से ही पेट्रोल, डीजल आदि की बिक्री पर मुनाफा होने लगा था, पर चूँकि आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू थी, इसलिए सरकार ने कीमतों में कटौती की घोषणा नहीं की। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर आकलन किया जाए तो तेल कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर रोजाना 44 करोड़ रुपए, डीजल पर 42 करोड़ रुपए का फायदा हो रहा है।
हालाँकि, केरोसिन की बिक्री पर इन कंपनियों को रोजाना 66 करोड़ रुपए और एलपीजी पर 29 करोड़ रुपए रोज का घाटा हो रहा है। तेल कंपनियों को चालू वित्तीय वर्ष में होने वाला घाटा भी कम होने का अनुमान है। माना जा रहा है कि वित्तीय वर्ष 2008-09 में तेल कंपनियों को 1,09,190 करोड़ रुपए का घाटा होगा। इस घाटे में पहली छमाही में ही 92,853 करोड़ रुपए का घाटा हो चुका है।
तेल कंपनियाँ चाहती हैं कि उन्हें लागत से कम कीमत पर पेट्रोलियम उत्पाद बेचने पर होने वाले घाटे को कम करने के लिए सरकार को बांड तेल की मात्रा बढ़ाना चाहिए। |