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रॉ पर ठीकरा फोड़ खाल बचाने की कोशिश
विनोद अग्निहोत्री

मुंबई पर समुद्री रास्ते से आतंकवादी हमले की खुफिया चेतावनी की रिपोर्ट को प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, इंटेलिजेंस ब्यूरो, नौसेना और मुंबई पुलिस ने सिर्फ फाइलों में दबाकर रख दिया।

यह चेतावनी विदेशों से खुफिया जानकारी जुटाने वाली केंद्रीय एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) ने 18 सितंबर से लेकर 26 नवंबर तक चार बार दी थी।

यही नहीं 29 नवंबर को ओबेरॉय होटल में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के लिए तीन दिन पहले एसपीजी ने होटल की सिर्फ दो मंजिलों की ही तलाशी ली और पहले से ही वहाँ ठिकाना जमाए आतंकवादियों और उनके हथियारों पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर ही नहीं पड़ी।

लेकिन अब सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की सारी कवायद रॉ को कटघरे में खड़ा करके खुद को बचाने की हो रही है। रॉ के सूत्रों का कहना है कि एजेंसी के चार्टर के मुताबिक विदेशों में अपने सूत्रों, नेटवर्क और स्रोतों के जरिये जानकारी जुटाने और इलेक्ट्रानिक सिग्नलों को इंटरसेप्ट करने, उन्हें डिकोड करके उनमें छिपे संदेशों को पढ़कर उनकी जानकारी देश में आईबी, सरकार और संबंधित विभाग के प्रमुख को दी जाती है। रॉ अपनी रिपोर्ट की बहुत ही सीमित प्रतियाँ भेजती है।

रॉ के एक अधिकारी के मुताबिक एजेंसी अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर देश के भीतर अपना कोई ऑपरेशन कर ही नहीं सकती है। रॉ का चार्टर इसकी इजाजत ही नहीं देता है।

लगातार चार बार मुंबई और गेट वे ऑफ इंडिया के सामने समुद्र की ओर मुख्य द्वार वाले बड़े होटल पर समुद्री रास्ते से आतंकवादी हमले के खतरे की सूचना देने से ज्यादा कुछ और कर पाना रॉ के क्षेत्राधिकार में है ही नहीं।

इसके आगे का काम आईबी, नौसेना, तटरक्षक बल और मुंबई पुलिस और उसकी खुफिया शाखा को करना था क्योंकि रॉ अपनी सूचना इन एजेंसियों को भेज चुकी थी, लेकिन इन एजेंसियों ने रॉ की सूचना को रूटीन जानकारी की तरह देखा और उस पर कोई ध्यान नहीं दिया।

रॉ की सूचना के बावजूद प्रधानमंत्री कार्यालय ने 29 नवंबर को मुंबई में ओबोरॉय होटल में प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह के कार्यक्रम की इजाजत दे दी और प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार एसपीजी ने होटल की छानबीन तो की लेकिन उसकी नजर भी वहाँ आतंकवादियों द्वारा पहले से पहुँचाए गए हथियारों को खोज नहीं पाई।

ऐसा क्यों हुआ इसके बारे में एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी बताते हैं कि एसपीजी ने सिर्फ कार्यक्रम वाली मंजिल और उसके ऊपर की मंजिल की तलाशी ली और बाकी होटल को छोड़ दिया। आमतौर पर एसपीजी ऐसा ही करती है। इसका फायदा भी आतंकवादियों ने उठाया और वह एसपीजी की नजरों से बच गए।

इस खुफिया अधिकारी का सवाल है कि अगर आतंकवादी 26 नवंबर की रात के बजाय 29 नवंबर को हमला करते तो देश में कितना बड़ा संकट खड़ा होता।

एक अन्य खुफिया अधिकारी का कहना है कि रॉ की सूचना के बाद ताज होटल में मुख्य द्वार पर वाहनों और सामान की जाँच की कवायद शुरू हुई थी लेकिन बाद में इसे रोक दिया गया। इससे भी साबित होता है कि मुंबई पुलिस ने भी रॉ की सूचना को बहुत गंभीरता से नहीं लिया।
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