मुख पृष्ठ > खबर-संसार > समाचार > राष्ट्रीय > जंग-ए-आजादी से ऑपरेशन ताज तक नौसेना
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजिएयह पेज प्रिंट करें
 
जंग-ए-आजादी से ऑपरेशन ताज तक नौसेना
(नौसेना दिवस पर विशेष)
जंग-ए-आजादी से लेकर मुंबई में ऑपरेशन ताज तक भारतीय नौसेना का इतिहास बहादुरी के कारनामों से भरा पड़ा है।

विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी इस नौसेना ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर भारी बमबारी कर उसे तबाह कर दिया था।

चार दिसंबर 1971 को ऑपरेशन ट्राइडेंट नाम से शुरू किए गए अभियान में मिली कामयाबी की वजह से ही हर साल चार दिसंबर को नौसेना दिवस मनाया जाता है।

1971 की लड़ाई में शामिल रहे कैप्टन सतीश कुमार ने बताया कि बांग्लादेश की मुक्ति में भारत की तीनों सेनाओं ने ही अद्भुत बहादुरी का प्रदर्शन किया था। नौसेना ने समुद्री क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए पाकिस्तान के कराची बंदरगाह को बमबारी से तबाह कर दिया और इस दौरान पाकिस्तान की पीएनएस गाजी पनडुब्बी जल में दफन हो गई।

उन्होंने बताया कि अभियान में आईएनएस विक्रांत ने खूब वाहवाही बटोरी। नौसेना की इस कामयाबी ने मुक्ति संग्राम में भारत की विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1971 ही नहीं बल्कि 1965 की लड़ाई में भी नौसेना ने बहादुरी का प्रदर्शन किया था।

यूँ तो नौसेना का इतिहास पौराणिक काल से ही माना जाता है, लेकिन ब्रिटिश उपनिवेश के दौरान रॉयल इंडियन नेवी नाम से सेना के रूप में इसे एक असल रूप मिला।

26 जनवरी 1950 को रॉयल इंडियन नेवी का नाम बदलकर भारतीय नौसेना कर दिया गया। भारतीय नौसेना ने आजादी की रक्षा ही नहीं की, बल्कि आजादी हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिन्द फौज द्वारा छेड़े गए सशस्त्र संघर्ष से प्रेरित होकर रॉयल इंडियन नेवी के भारतीय सदस्यों ने 18 फरवरी 1946 को एचआईएमएस तलवार नाम के जहाज से जंग ए आजादी का ऐलान कर दिया था।

नौसैनिकों का यह विद्रोह इतना तीव्र था कि जल्द ही यह 78 जहाजों और 20 तटों तक फैल गया था तथा इसमें 20 हजार नाविक शामिल हो गए थे। उन्होंने लाउडस्पीकरों से आजादी के तराने गाए और कई जगह गोरे नौसैनिकों के साथ उनकी हिंसक मुठभेड़ हुई।

इतिहासकार सदानंदन के अनुसार भारतीय नेताओं का समर्थन न मिलने के कारण नौसैनिकों का यह विद्रोह हालाँकि सफल नहीं हो पाया लेकिन अंग्रेजों के दिलों में यह डर जरूर छोड़ गया कि अब उनकी भारत से भागने में ही भलाई है।

सदानंदन का कहना है कि इस घटना से अंग्रेजों के मन में यह खौफ पैदा हो गया था कि भारतीय सैनिक कभी भी विद्रोह का बिगुल फूँककर भारत में मौजूद सभी अंग्रेजों को खत्म कर सकते हैं।

कैप्टन सतीश ने कहा कि भारतीय नौसेना के इतिहास में वीरता के कारनामों की कमी कभी नहीं रही। 1961 में गोवा से पुर्तगालियों को खदेड़ने में भी इस बल की महत्वपूर्ण भूमिका रही और ऑपरेशन विजय को अंजाम तक पहुँचाया।

वर्तमान में 55 हजार कर्मियों वाली भारतीय नौसेना दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी नौसेना है, जिसके पास विमानवाहक पोत आईएनएस विराट सहित 155 से अधिक जहाज हैं और दो हजार से अधिक मैरीन कमांडो हैं।

नौसैनिक बेड़े में 2015 तक तीन विमान वाहक पोत और कम से कम तीन परमाणु पनडुब्बियों को शामिल किए जाने की उम्मीद है।

भारतीय नौसेना के मार्कोस कमांडो दुनिया के बेहतरीन कमांडो में शामिल हैं, जिन्होंने हाल ही में मुंबई में होटल ताज में घुसे आतंकवादियों को मौत के आगोश तक पहुँचाने के लिए एनएसजी कमांडो के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मार्कोस कमांडो ने 1988 में भारतीय जलक्षेत्र में अपहृत जहाज में मालदीव के तत्कालीन शिक्षामंत्री सहित बहुत से बंधकों की जान बचाकर ऑपरेशन कैक्टस को बखूबी सफलता के अंजाम तक पहुँचाया था। मार्कोस जम्मू-कश्मीर की झेलम नदी और वुलर में भी जलमार्ग से आतंकवादियों की घुसपैठ को विफल करते रहे हैं।

भारतीय नौसेना ने इस समय अदन की खाड़ी में आईएनएस तलवार को तैनात कर रखा है जो सोमालिया के समुद्री डाकुओं से जहाजों को बचाने का काम कर रहा है।

आईएनएस तलवार ने हाल ही में समुद्री डाकुओं के एक जहाज को डुबो दिया। इसने अब तक 35 जहाजों को सुरक्षित उनके स्थान तक पहुँचाने में मदद की है।
संबंधित जानकारी खोजें
और भी
रूस से पनडुब्बी लेने का मामला अधर में
महाशक्ति का सपना देख रहे भारत के लिए झटका
आतंकियों को पाकिस्तान की मदद-आडवाणी
भारत पर अब हवाई आतंक का खतरा
मेरा राजनीतिज्ञ होना इत्तफाक-मनमोहनसिंह
दिल्ली के स्कूलों में छिपे हैं आतंकी!