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रूस से पनडुब्बी लेने का मामला अधर में
'आकुला-2' देने में रूस काट रहा है कन्नी
विमानवाही पोत गोर्शकोव का मामला अभी सुलझा भी नहीं था कि रूस ने परमाणु पनडुब्बी नेपो के सौदे को भी अधर में लटका दिया है। दोनों देशों के बीच चल रही संयुक्त कार्यदल की बैठक में भी यह मुद्दा छाया हुआ है।

रूसी रक्षामंत्री अनातोली सेर्दूकोव की भारत यात्रा के समय दोनों देशों के रक्षा सचिवों की अध्यक्षता में एक उपसमिति का गठन किया गया था, जिसकी पहली बैठक मंगलवार से नई दिल्ली में शुरू हुई। इसमें रूस से 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भाग लेने आया है।

इस प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता से पहले रक्षा मंत्रालय ने विमानवाही पोत गोर्शकोव की कीमत पर फिर से सौदेबाजी शुरू करने का हक कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति से हासिल कर लिया लेकिन परमाणु पनडुब्बी आकुला-2 को देने से रूस मुकरता नजर आ रहा है।

एडमिरल गोर्शकोव का सौदा डेढ़ अरब डॉलर में हुआ था और इसके बाद रूस ने एक अरब बीस करोड़ डॉलर की अतिरिक्त माँग कर दी। हाल ही में रूसी शिपयार्ड के अधिकारियों ने इस माँग में अस्सी करोड़ डॉलर की माँग और जोड़ दी और कहा कि भारत को दो अरब डॉलर अतिरिक्त देने होंगे।

रक्षा सूत्रों के अनुसार परमाणु पनडुब्बी को अपने बेड़े में शामिल करने की बात रूस ने उसकी कीमत बढ़वाने के लिए ही शुरू की है। नौसेना प्रमुख एडमिरल सुरीश मेहता से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपने बयान से स्थिति को और भी जटिल बना दिया।

उन्होंने कहा कि यह सच है कि परमाणु पनडुब्बी के बारे में दोनों देशों की सरकारों के बीच बातचीत चल रही थी। यह भी सच है कि रूस इस परमाणु पनडुब्बी को अपने बेड़े में शामिल करने वाला था परंतु अब क्या स्थिति है इस बारे में मैं कुछ नहीं कहना चाहता।

भारत ने रूस से नेपो नाम की आकुला श्रेणी की इस पनडुब्बी को लेने के लिए 65 करोड़ डॉलर का सौदा किया था। इस पनडुब्बी में पिछले महीने हुए हादसे में 21 लोग मारे गए थे और समझा जाता है कि इस मामले की जाँच के कारण इसे अगस्त 2009 में भारत के सुपुर्द करने में देरी होगी। लेकिन हादसे के तुरंत बाद रूसी नौसेना के अनेक अधिकारी यह कहते रहे हैं कि नेपो पनडुब्बी उनकी अपनी नौसेना में शामिल होने वाली है।

भारत इस पनडुब्बी को आईएनएस चक्र नाम से दस साल की लीज पर अपने बेड़े में शामिल करने वाला था। दोनों देशों के बीच गोर्शकोव के बाद अब यह नया विवाद रक्षा संबंधों में और भी खटास पैदा कर सकता है। समझा जाता है कि रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव की पाँच दिसंबर से प्रस्तावित भारत यात्रा के दौरान इस मामले को हल करने की कोशिश की जाएगी।
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