भारत में हर घंटे 14 लोग विभिन्न कारणों से आत्महत्या कर लेते हैं। खुदकुशी करने वाले हर तीन लोगों में से एक युवा वर्ग का होता है जबकि हर पाँच में से एक गृहिणी होती है।
राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) के देश में हुई दुर्घटनाओं तथा आत्महत्याओं के ताजा आँकड़ों में यह चिन्ताजनक तथ्य उभरकर सामने आया है।
एनसीआरबी की एक्सीडेंटल डेथ्स एण्ड सुसाइड इन इंडिया 2007 शीर्षक वाली रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल 43,342 महिलाओं समेत 1,22,637 लोगों ने खुदकुशी की। इस दौरान ऐसी घटनाओं में विगत वर्ष की तुलना में 3.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 15184 लोगों ने आत्महत्या का कदम उठाया। यह तादाद ऐसी घटनाओं की कुल संख्या का 12.4 प्रतिशत है। उसके बाद आंध्रप्रदेश में 14882 लोगों ने खुद ही अपनी इहलीला समाप्त कर ली। यह संख्या ऐसी कुल घटनाओं की 12.1 फीसदी है।
रिपोर्ट के मुताबिक परिवार के लोगों द्वारा सामूहिक रूप से आत्महत्या के मामलों में 264 लोगों ने जान दे दी। इनमें 118 पुरुष तथा 146 महिलाएँ शामिल हैं।
साक्षरता के मामले में देश में अव्वल राज्य केरल ऐसे मामलों में भी अप्रत्याशित रूपसे सबसे आगे है। पिछले साल यहाँ सामूहिक रूप से आत्महत्या के मामलों में 39 लोगों ने खुदकुशी कर ली। उसके बाद आंध्रप्रदेश (34) तथा मध्यप्रदेश (12) का नंबर आता है।
आत्महत्या के कारणों में परिवार से जुड़ी समस्याएँ तथा बीमारी से उपजी निराशा भी शामिल है। आत्महत्या की घटनाओं की कुल संख्या में इन कारणों का हिस्सा क्रमश: 23.8 तथा 22.3 फीसदी है।
भावनात्मक लगाव तथा अपने नायकों के प्रति दीवानगी में 261 लोगों ने पिछले साल अपनी जान गँवाई। बीमारी की वजह से जिन 27332 लोगों ने खुदकुशी की उनमें 952 को एड्स अथवा अन्य यौन जनित रोग था जबकि 794 लोग कैंसर तथा 496 लोग लकवा से पीड़ित थे।
एड्स अथवा यौन जनित रोगों से त्रस्त होकर आत्महत्या करने वालों में 334 महिलाएँ भी शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या उन लोगों की है जो 30 से 44 वर्ष आयु वर्ग के थे।
एक चिंताजनक तथ्य यह भी है कि एड्स या यौन जनित रोगों से पीड़ित ऐसे सात लड़के-लड़कियों ने आत्महत्या की जिनकी उम्र 14 वर्ष से कम थी।
आत्महत्या करने वालों में से ज्यादातर लोगों ने जहर खाकर अथवा फांसी लगाकर खुदकुशी की। जहां 34.8 फीसदी लोगों ने जहर खाकर आत्महत्या की वहीं 31.7 प्रतिशत लोगों ने फाँसी लगाकर खुदकुशी कर ली।
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि खुदकुशी करने वाली कुल महिलाओं में 24162 55.7 फीसदी गृहिणियाँ शामिल हैं। यह तादाद आत्महत्या करने वाले कुल लोगों की संख्या का 19.7 प्रतिशत है।
खुदकुशी करने वाले लोगों में सरकारी कर्मचारियों की संख्या डेढ़ प्रतिशत निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की तादाद 8.2 फीसदी तथा सार्वजनिक क्षेत्र की फर्मों में काम करने वालों की संख्या 2.2 प्रतिशत है। |