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खाड़ी में और युद्धपोत भेजेगा भारत
सोमालिया के खतरनाक जल क्षेत्र में समुद्री लुटेरों के खिलाफ सफल कार्रवाई से उत्साहित भारतीय नौसेना अदन की खाड़ी में चार और जंगी पोत भेजने के प्रस्तावों पर विचार कर रही है।

नौसेना के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने गुरुवार को यहाँ बताया अरब सागर के इस जोखिम वाले समुद्री इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के अलावा नौसेना अदन की खाड़ी में 30 मील चौड़ी और 480 समुद्री मील लम्बी पट्टी को सुरक्षित कारिडोर के रूप में तब्दील करने की योजना पर काम कर रही है।

अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की कि जहाजरानी मंत्रालय ने भारतीय नौसेना से चार और जंगी पोत सोमालिया के आसपास के जल क्षेत्र में गश्त के लिए भेजने का आग्रह किया है। नाम गोपनीय रखने की शर्त पर नौसेना के इस उच्चाधिकारी ने कहा सिर्फ जहाजरानी मंत्रालय ने ही नहीं, बल्कि अनेक वाणिज्यिक पोत संगठनों ने भी हमसे मौजूदगी बढ़ाने का अनुरोध किया है।

हम बेशक वहाँ अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन समुद्री लुटेरों की समस्या ने इतना विकराल रूप ले लिया है कि कोई एक अकेली नौसेना इससे पार नहीं पा सकती।

अदन की खाड़ी में तैनात भारतीय नौसेना के जंगी पोत आईएनएस तबर ने मंगलवार की शाम पाँच घंटे तक चली कार्रवाई में समुद्री लुटेरों पर धावा बोलकर उनके एक पोत को नेस्तनाबूद कर दिया था और दो दर्जन लुटेरों को दुम दबाकर भागने को मजबूर कर दिया था।

अरब सागर के इस इलाके में अमेरिका की अगुआई में नाटो की नौसेनाओं और यूरोपीय गठबंधन तैनात हैं, लेकिन यह पहला मौका है जब समुद्री लुटेरों से सीधे टकराते हुए किसी नौसेना ने कार्रवाई की है।

नौसेना ने कहा समुद्री लुटेरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सुरक्षा परिषद के तहत प्रदत्त अधिकारों में पर्याप्त लचीलापन है, लेकिन जरूरत इस बात की है कि संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले सामूहिक कार्रवाई की जाए।

नौसेना का कहना है अरब सागर के करीब 500 समुद्री मील तक के इलाके में ये लुटेरे सक्रिय हैं, लिहाजा इतने विशाल जल क्षेत्र की निगरानी करना एक बहुत बड़ी चुनौती है। इसके लिए सामूहिक प्रयास करने ही होंगे।

समुद्री लुटेरों के हमले के तौर-तरीकों के बारे में नौसेना के अधिकारी ने कहा कि ये लुटेरे अपनी कार्रवाई में बहुत शातिर हो गए हैं। हमला करते समय पहले दो तीन स्पीड बोट से वे जहाज की ओर बढते हैं और अगवा किए जाने वाले जहाज के चालक दल का ध्यान बँटाते हैं। फिर कई ओर से उनकी आठ नौ नौकाएँ जहाज की ओर चारों तरफ से बढ़ती हैं और लुटेरे जहाज के चालक दल को बंधक बना लेते हैं।

अपहरण के दूसरे चरण में ये डाकू अपनी पसंद का बंदरगाह चुनकर जहाज को वहाँ ले जाते हैं। अकसर इन अगवा किए हुए जहाजों को ऑइल या होबियो ले जाया जाता है, जहाँ जल दस्युओं के पास तमाम तरह की सुविधाएँ मौजूद हैं।

अगवा किया हुआ जहाज आने पर दस्युओं का पूरा अमला सक्रिय हो जाता है और चालक दल एवं जहाज को पूरी तरह कब्जे में ले लिया जाता है।
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