केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के करीब चार लाख अधिकारी और सुपरवाइजर स्तर के कर्मियों को अब तक की सर्वाधिक वेतन वृद्धि की सौगात देते हुए सरकार ने कहा है कि इससे केन्द्रीय उपक्रमों का प्रदर्शन सुधरेगा और उच्च कर्मचारियों का निजी क्षेत्र की तरफ पलायन रुकेगा।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार प्रातः हुई बैठक में केन्द्रीय उपक्रमों के लिए गठित दूसरी वेतन निर्धारण समिति की सिफारिशों को मंजूरी दे दी। नए वेतनमान एक जनवरी 2007 से लागू होंगे।
इससे करीब 151 मुनाफा कमाने वाले केन्द्रीय उपक्रमों के 2.58 लाख अधिकारी स्तर के और 1.20 लाख यूनियन से अलग रहने वाले सुपरवाइजर स्तर के कर्मचारियों को वेतन वृद्धि का लाभ मिलेगा।
नए पैकेज से केन्द्रीय उपक्रमों पर 9000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और उनका वेतन बिल 22000 करोड़ रुपए तक पहुँच जाएगा।
भारी उद्योग मंत्री संतोष मोहनदेव ने बताया घाटे में चलने वाले केन्द्रीय उपक्रम के कर्मी वेतन वृद्धि के पैकेज से महरूम रहेंगे। नया पैकेज लागू करने के लिए उन्हें लगातार तीन साल तक मुनाफा कमाना होगा। पिछले साल कुल 217 केन्द्रीय उपक्रम थे, जिनमें से 151 मुनाफा कमा रहे थे। इनमें से भी 76 उपक्रम ही मजबूत हैं और वही नए वेतनमानों को पूरी तरह से लागू करने की स्थिति में बाकी 75 उपक्रम नए पैकेज को आंशिक रूप में ही लागू कर पाएँगे। शेष 66 घाटे में चलने वाले उपक्रम नए पैकेज का लाभ नहीं उठा पाएँगे।
संतोष मोहन देव ने इस पैकेज को अब तक का सबसे बेहतर पैकेज बताते हुए कहा कि इससे कर्मचारियों के वेतन में औसतन 96 प्रतिशत तक वृद्धि होगी। नए वेतनमानों के मुताबिक 'ए' श्रेणी में आने वाले केन्द्रीय उपक्रमों के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशकों का मूल वेतन अब 80 हजार से शुरू होकर सवा लाख रुपए मासिक तक होगा।
इसके अलावा आवास भत्ता, महँगाई भत्ता तथा अन्य भत्ते भी देय होंगे। 'ए' श्रेणी के उपक्रमों में निदेशक मंडल के सदस्यों का वेतन 75 हजार से शुरू होकर एक लाख रुपए के बीच रहेगा। सबसे निम्न 'डी' श्रेणी में आने वाले उपक्रमों के सीएमडी के लिए 51300 से लेकर 73000 रुपए तक का मूल वेतन पाएँगे, जबकि इस श्रेणी के निदेशक मंडल के सदस्यों के लिए 43200 से 66000 रुपए तक के नए वेतनमान तय किए गए हैं।
देव ने बताया सरकार ने कार्यकारी अधिकारियों की पुरानी माँग को मानते हुए ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 3.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 10 लाख रुपए कर दी है। नए पैकेज में सरकार ने कार्यकारी स्तर के सभी अधिकारियों को एक जनवरी 2007 के उनके मूल वेतन पर 30 प्रतिशत की समान दर से फिटमेंट देने का फैसला किया है।
इसके ऊपर महँगाई भत्ता देय होगा। केन्द्रीय उपक्रमों की वर्तमान चार श्रेणियों को यथावत रखा गया है।
भारी उद्योग विभाग में सचिव डॉ. सत्यनारायण दास ने बताया सरकार ने दूसरी वेतन समीक्षा समिति की महँगाई भत्ता, आवास भत्ता, लीज पर ली गई सुविधा, शहरी क्षतिपूर्ति भत्ता तथा अन्य भत्तों सहित सभी सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है।
वरिष्ठ और कनिष्क कर्मचारियों के बीच समान वेतन की विसंगति दूर करने के लिए प्रत्येक दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर एक अतिरिक्त वेतन वृद्धि दी जाएगी। सालाना वेतन वृद्धि के लिए 3 प्रतिशत की समान दर तय की गई है। वेतनमान के शीर्ष स्तर पर पहुँचने के बाद भी इसी दर पर सालाना वेतन वृद्धि मिलेगी।
दास ने बताया मामूली मुनाफा कमाने वाले उपक्रमों के मामले में भी सरकार ने उनके वर्तमान वेतन में 10 से 20 प्रतिशत फिटमेंट तथा महँगाई भत्ते को स्वीकार किया है। उपक्रम अपनी क्षमता के अनुरूप इसे लागू कर सकेंगे।
उन्होंने बताया सुपरवाइजरों के लिए उपयुक्त पैकेज संबंधित उपक्रम के निदेशक मंडल द्वारा तय किया जाएगा। नए वेतनमान के लागू होने से आना वाला अतिरिक्त खर्च सभी उपक्रम स्वयं उठाएँगे।
केन्द्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश एम. जगन्नाथ राव की अध्यक्षता में केन्द्रीय उपक्रमों की वेतन समीक्षा समिति का गठन किया था। समिति ने इसी साल 30 मई को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। समिति की सिफारिशों पर 32 मंत्रालयों और विभागों से प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। समिति की सिफारिशों पर मंथन के लिए सचिवों की भी एक समिति गठित की गई।
समिति ने दस दिन के भीतर दो बार बैठक कर इन पर विचार किया और उसके बाद आज मंत्रिमंडल ने इन पर अपनी मुहर लगा दी। |