अगर अंबाला के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर के लिखे एक टेलीग्राफिक संदेश पर भरोसा किया जाए तो भारतीय स्वतंत्रता का पहला युद्ध मेरठ से भी पहले हरियाणा के अंबाला में शुरू हुआ था।
यह संदेश 10 मई 1857 को डिप्टी कलेक्टर टीडी फोरसिथ ने पंजाब के मुख्य आयुक्त जॉन लारेंस को भेजा था। यह दुर्लभ दस्तावेज यहाँ आयोजित एक प्रदर्शनी में दिखाया गया है।
संदेश में लिखा गया है कि आज सुबह 60वीं और पाँचवीं रेजिमेंट उत्तेजित अवस्था में थीं और परेड ग्राउंड पर सशस्त्र थीं। घुड़सवार और तोपखाने को बाहर आने का आदेश दिया गया। हालाँकि कोई वास्तविक दंगा-फसाद नहीं...मैंने पुलिस जवानों को तैयार और मौजूद रहने का हुक्म दे दिया है।
कुमायूँ बटालियन के लेफ्टिनेंट एच. ग्रांट के लिखे एक पत्र में भी गदर को दबाने के लिए ब्रिटिश जवानों के बारोटा के मियोज रीवासन और घसेरा पर हमले का जिक्र है। इसकी एक प्रति को भी प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में शामिल दस्तावेजों से जाहिर है कि हरियाणा में बर्तानी फौज के खिलाफ अंतिम लड़ाई 18 नवंबर 1857 को राव तुलाराम के नेतृत्व में नसीबपुर के मैदान में लड़ी गई थी।
एक अन्य दस्तावेज में उस घटना पर प्रकाश डाला गया है, जब ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गाँधी को इस डर से पंजाब नहीं जाने दिया था कि वहाँ तत्कालीन सरकार के खिलाफ आंदोलन चल रहा था। महात्मा गाँधी को 10 अप्रैल 1919 को पलवल में गिरफ्तार कर लिया गया था।
इस समाचार को अगले दिन बंबई क्रोनिकल ने प्रकाशित किया था और इस समाचार की प्रति भी महात्मा गाँधी की हस्तलिपि के साथ प्रदर्शित की गई है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि वह ब्रिटिश सरकार के निर्देश का पालन करने में असमर्थ हैं। |