भारत रत्न से सम्मानित होने वाले पंडित भीमसेन जोशी जिस किराना घराने के गायक हैं, उसका इतिहास मात्र सौ साल पुराना है और उसकी स्थापना अब्दुल करीम खाँ जैसे महान गायक ने की थी।
किरान घराने का नाम दरअसल उत्तरप्रदेश के सहारनपुर के कैराना गाँव पर पड़ा है। उस्ताद करीम खाँ इसी गाँव के रहने वाले थे। लेकिन वह बाद में मुबंई में बस गए और धीरे-धीरे कैराना गाँव किराना घराना में तब्दील हो गया।
यह कहना है प्रसिद्ध संगीत विशेषज्ञ एवं दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर मुकेश गर्ग का जो पिछले 34 साल से संगीत नामक पत्रिका का संपादन कर रहे हैं। गर्ग के अनुसार शास्त्रीय संगीत की दुनिया में आज पाँच-छह घराने ही मशहूर है जिनमें ग्वालियर घराना सबसे पुराना है
उसका इतिहास 150 साल का है। कुमार गंधर्व इस घराने के मशहूर गायकों में से एक थे। पुराने गायकों में पंडित ओंकारनाथ ठाकुर भी इसी घराने के थे। गर्ग का कहना है कि ग्वालियर घराने के अलावा आगरा घराना, जयपुर घराना, हिन्दी बाजार तथा रामपुर सहसवान घराना के अलावा किराना घराना मशहूर घराने हैं।
इसके अतिरिक्त पटियाला घराना और इंदौर घराना भी है। पटियाला घराने के मशहूर गायकों में बडे़ गुलाम अली खाँ और इंदौर घरानो के दिग्गज गायकों में अमीर खाँ हुए। जयपुर घराने के बडे़ गायकों में पंडित मल्लिकार्जुन मंसूर थे।
गर्ग का कहना है कि ख्याल गायिकी की देश में लंबी परम्परा है और पंडित जोशी उसके महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। दरअसल ज्यादतर गायक ख्याल ही गाते हैं। द्रुपद और ठुमरी गाने वाले कम ही गायक बचे हैं।
फयाज खाँ, अमानत अली, करीम खाँ, मौला बख्श, केसर बाई केडकर, हीराबाई वाडोदकर से लेकर किशोरी अमोनकर और पंडित जसराज जैसे गायक ख्याल गायिकी के ही उस्ताद हैं।
उनका कहना है कि पंडित जोशी की गायन की खासियत है कि उनकी आवाज में एक गहरी कशिश है इसके अलावा उनमें दर्द एवं कोमल भावनाएँ हैं, जो आम आदमी के दिलो दिमाग को छूती हैं।
वह ऐसे शास्त्रीय गायक हैं, जिन्हें आम श्रोता भी पंसद करते हैं। उन्होंने शास्त्रीय गायन को जन-जन तक पहुँचाया है और अपनी गुणवत्ता भी बरकरार रखी है। इसलिए वह निर्विवाद रूप से भारत रत्न के हकदार हैं।
गर्ग का कहना है कि आज गंगूबाई हंगल जैसी बड़ी एवं वयोवृद्ध गायिका हैं, जिनकी अवस्था 95-96 वर्ष हो गई है, लेकिन पंडित जोशी की लोकप्रियता अधिक है।
भारत रत्न ऐसे ही व्यक्ति को दिया जाना चाहिए जो आम जन में भी लोकप्रिय हो। इनमें सुब्बालक्ष्मी और बिसमिल्लाह खाँ के बाद पंडित जोशी को ही यह लोकप्रियता प्राप्त है। उनका व्यक्तित्व गरिमामय, सादगीपूर्ण, विनम्रता तथा समर्पण से परिपूर्ण है।
वह शास्त्र और परम्परा से ज्यादा बँधे हैं, जबकि कुमार गंधर्व ने शास्त्र और परम्परा से हटकर अपनी अलग शैली बनाई थी और अपने आप मे एक घराना बन गए थे। |