शास्त्रीय संगीत के महान कलाकार पंडित भीमसेन जोशी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की घोषणा की गई। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने पंडित भीमसेन जोशी को भारत रत्न से अलंकृत करने का फैसला किया। राष्ट्रपति की प्रवक्ता ने मंगलवार देर रात यह जानकारी दी।जीवन परिचय: 14 फरवरी, 1922 को कर्नाटक के गडग में जन्मे पंडित भीमसेन जोशी को बचपन से ही संगीत का बहुत शौक था। वह किराना घराने के संस्थापक अब्दुल करीम खान से बहुत प्रभावित थे।1932 में वह गुरू की तलाश में घर से निकल पडे़। अगले दो वर्षों तक वह बीजापुर, पुणे और ग्वालियर में रहे। उन्होंने ग्वालियर के उस्ताद हाफिज अली खान से संगीत की शिक्षा ली। घर वापसी से पहले वे कोलकाता और पंजाब भी गए। वर्ष 1936 में पंडित भीमसेन जोशी ने जाने-माने खयाल गायक और अब्दुल करीम खान के शिष्य सवाई गंधर्व, पंडित रामभन कुंडगोलकर से कुंडगोल में गहन शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने सवाई गंधर्व से कई वर्षों तक खयाल गायकी की बारीकियाँ सीखीं।पंडित भीमसेन जोशी ने अपनी विशिष्ट शैली विकसित करके किराना घराने को समृद्ध किया और दूसरे घरानों की विशिष्टताओं को भी अपने गायन में समाहित किया। उन्होंने कई रागों को मिलाकर कलाश्री और ललित भटियार जैसे नए रागों की रचना भी की।उन्हें खयाल गायन के साथ-साथ ठुमरी और भजन में भी महारत हासिल है। उन्होंने पहली बार अपने गुरू सवाई गंधर्व के 60वें जन्मदिवस पर जनवरी 1946 में पुणे में पहली बार सार्वजनिक कार्यक्रम पेश किया था। उनके द्वारा गाए गए गीत 'पिया मिलन की आस' 'जो भजे हरि को सदा' और 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' बहुत प्रसिद्ध हुए।भीमसेन जोशी को पद्मश्री (1972), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1976), पद्म भूषण (1985) और पद्म विभूषण (1999) जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। (चित्र सौजन्य : संजय पटेल)शास्त्रीय संगीत के बेताज बादशाह हैं पंडितजीमौन मुख मंडल पर स्वरों की आभाआम आदमियों के भी सुर हैं भीमसेन |
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